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SP सुरेन्द्र दास की रगों में दौड़ रहा जहर डॉक्टरों के लिए बड़ी चुनौती

आईपीएस सुरेन्द्र दास की रगों में दौड़ रहा जहर डॉक्टरों के लिए बड़ी चुनौती है। 0.5 ग्राम सल्फास से ही इंसान की मौत संभव है और सुरेन्द्र दास की रगों में लगभग 25 ग्राम सल्फास पहुंच चुका है। विशेषज्ञों के मुताबिक इस जहर का दुनिया में अभी तक कोई एंटीडोट यानी इसके असर को कम करने की कोई दवा नहीं बनी।

अपोलो एक्स्ट्रा अस्पताल के आईसीयू विभागाध्यक्ष डॉ. सच्चिदानंद गुप्ता का कहना है कि दरअसल सल्फास पेट में जाकर वहां मौजूद हाइड्रोक्लोरिक एसिड और पानी के साथ मिलकर फास्जीन गैस बना लेती है। क्योंकि सल्फास में एल्मुनियम सल्फाइड होता है। यह फास्जीन गैस बेहतद खतरनाक होती है जो शरीर की कोशिकाओं में तेजी से फैलती। खासतौर से हार्ट, ब्रेन, फेफड़े और किडनी की कोशिकाओं में ऑक्सीजन लेने की क्षमता खत्म कर देती है। मरीज को कृत्रिम अंगों के सहारे जैसे तैसे जीवन देने की कोशिश होती है। डॉ. सच्चिदानंद गुप्ता कहते हैं कि यह बड़ी समस्या है कि इस जहर के असर को खत्म करने या कम करने की कोई दवा उपलब्ध नहीं है। डॉ. गुप्ता का कहना है कि वेंटीलेटर से ही मरीज को कुछ दिनों के लिए सहारा दिया जा सकता है।

एक्स्ट्रा कारपोरियल मेम्ब्रेन ऑक्सीजेनेटर(इक्मो) मशीन इलाज का अंतिम विकल्प: मुम्बई से विशेषज्ञों की टीम के साथ आई इक्मो मशीन इलाज का अंतिम विकल्प है। डॉ. सच्चिदानंद गुप्ता का कहना है कि यह मशीन एक तरह से अहम अंगों गुर्दा,ब्रेन, हार्ट, फेफड़े आदि के लिए कृत्रिम सहारा है। जो चार पांच दिनों के लिए सपोर्ट कर सकती है।

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