Breaking News

अध्यात्म

इस मंत्र को बोलने से ही नहीं बल्कि सुनने से भी हो जाती है मनोकामना पूरी

हिन्दू धर्म में मंत्र का विशेष महत्व माना गया है, इसके माध्यम से किसी भी प्रकार के कार्य को सिध्द किया जा सकता है, बस इसके लिए जरूरी है कि आपको सही समय पर सही मंत्र का ज्ञान हो। आज ...

Read More »

राशिफल 17 अप्रैल: तुला राशि के लिए लाभ का दिन, आपके लिए…

मेष (Aries): गणेशजी के आशीर्वाद से आपके हरेक कार्य में उत्साह और उमंग छलकता हुआ प्रतीत होगा। तन-मन में स्फूर्ति और ताजगी का अनुभव करेंगे। पारिवारिक वातावरण खुशहाल रहेगा। मित्रों के साथ आनंद में समय व्यतीत होगा। माता की तरफ से ...

Read More »

दबा हुआ धन वापस पाना है तो अक्षय तृतीया के दिन घर में लाएं ये एक चीज, बरसेगी मां लक्ष्मी की कृपा

बैशाख मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया यानी18 अप्रैल को मां लक्ष्मी विशेष कृपा बरसाएंगी। बस ये एक काम करें… पंडित संतराम के मुताबिक, इस दिन घर की साफ-सफाई करके मां लक्ष्मी का पूजन बहुत ही शुभ फलदायी होता है। ...

Read More »

भगवान के अनुसार करें उन्हे नैवेद्य अर्पण, मनोकामना होगी पूरी

हिन्दू धर्म में पूजा-पाठ का विषेश महत्व है। मान्यता के अनुसार भगवान की कृपा पाने के लिए हर इंसान पूजा-पाठ व भगवान कि आराधना करता है। जिसमें हर छोटी-छोटी चीजों का बड़ा ही महत्व होता है। अगर आप पूरे विधि-विधान ...

Read More »

राशिफल: 16 अप्रैल 2018, सोमवार

मेष (Aries): आज का दिन आपके लिए शुभ है। परिजन तथा मित्रों के साथ समारोह में उपस्थित रह सकते हैं। नए कार्य का प्रारंभ करने के लिए उत्साह रहेगा। सेहत का ध्यान रखें, धनप्राप्ति का योग है। ads by adgebra वृष ...

Read More »

अक्षय तृतीया पर भूलकर भी ना करें ये 5 गलतियां वरना माता लक्ष्मी हो जाएंगी नाराज

अक्षय तृतीया को सबसे शुभ दिनों में से एक माना जाता है। इस बार 18 अप्रैल को यह पर्व मनाया जाएगा। इस त्योहार पर माता लक्ष्मी की कृपा पाने का सबसे अच्छा समय होता है। माता लक्ष्मी इस दिन अपने ...

Read More »

राशिफल 15 अप्रैल 2018: वृष राशि के लिए लाभप्रद दिन, आपके लिए कैसा…

मेष (Aries): आज के दिन धार्मिक और आध्यात्मिक प्रवृत्तियां विशेष रहेंगी। मन में ठोस निर्णय न ले पाने की दुविधा रहेगी। पैसे की लेन-देन या आर्थिक व्यवहार न करने की गणेशजी की सलाह है। शारीरिक और मानसिक बेचैनी का अनुभव करेंगे। ...

Read More »

क्या अस्त ग्रह फल भी देते हैं, जानें कैसे करें उन्हें बलशाली

मल्टीमीडिया डेस्क। आकाश मंडल में कोई भी ग्रह जब सूर्य से एक निश्चित दूरी के अंदर आ जाता है, तो सूर्य के तेज से वह ग्रह अपनी शक्ति खोने लगता है। इसे ही ग्रह का अस्त होना माना जाता है। जब कोई ग्रह अस्त हो जाता है, तो उसके फल देने की स्थिति में कमी आ जाती है। यानी यदि वह शुभ फल देने वाला है, तो पूर्ण शुभ फल नहीं दे पाता है। यदि अशुभ फल देने वाला है, तो उसके अशुभ फल देने में कमी आ जाती है। सूर्य के समीप आने पर छहों ग्रह अस्त हो जाते हैं, लेकिन राहु और केतु कभी अस्त नहीं होते हैं। इतने करीब होने पर होते हैं अस्त ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, चंद्रमा सूर्य के दोनों ओर 12 डिग्री या इससे अधिक करीब आने पर अस्त माने जाते हैं। वहीं, सूर्य के दोनों ओर 11 डिग्री या इससे अधिक समीप आने पर गुरू अस्त माने जाते हैं। शुक्र, सूर्य के दोनों ओर 10 डिग्री या इससे अधिक समीप आने पर अस्त माने जाते हैं। वक्री शुक्र यदि सूर्य के दोनों ओर 8 डिग्री या इससे अधिक करीब हो, तो अस्त माना जाता है। सूर्य के दोनों ओर 14 डिग्री या इससे अधिक समीप आने पर बुध अस्त माने जाते हैं। वक्री बुध यदि सूर्य के दोनों ओर 12 डिग्री या इससे अधिक करीब हो, तो अस्त माने जाते हैं। सूर्य के दोनों ओर 15 डिग्री या इससे अधिक समीप आने पर शनि अस्त माने जाते हैं। अतिरिक्त बल देने की जरूरत अस्त ग्रहों सही फल दें, इसके लिए उन्हें अतिरिक्त बल देने की जरूरत होती है। कुंडली के आधार पर यह निर्णय किया जाता है कि अस्त ग्रह को अतिरिक्त बल कैसे प्रदान किया जा सकता है। यदि वह ग्रह शुभ फल देने वाला है, तो उसे अतिरिक्त बल प्रदान करना चाहिए। इसके लिए जातक को संबंधित ग्रह का रत्न धारण करवाया जाता है। हालांकि, यदि किसी अस्त ग्रह अशुभ फल देने वाला है या अकारक है, तो उसे अतिरिक्त बल नहीं देना चाहिए। इस स्थिति में संबंधित ग्रह का रत्न नहीं पहनाना चाहिए। इस स्थिति में उस ग्रह के मंत्र, बीज मंत्र या सामान्य पूजा से उसे ठीक करना चाहिए।

 आकाश मंडल में कोई भी ग्रह जब सूर्य से एक निश्चित दूरी के अंदर आ जाता है, तो सूर्य के तेज से वह ग्रह अपनी शक्ति खोने लगता है। इसे ही ग्रह का अस्त होना माना जाता है। जब कोई ...

Read More »

क्या अस्त ग्रह फल भी देते हैं, जानें कैसे करें उन्हें बलशाली

मल्टीमीडिया डेस्क। आकाश मंडल में कोई भी ग्रह जब सूर्य से एक निश्चित दूरी के अंदर आ जाता है, तो सूर्य के तेज से वह ग्रह अपनी शक्ति खोने लगता है। इसे ही ग्रह का अस्त होना माना जाता है। जब कोई ग्रह अस्त हो जाता है, तो उसके फल देने की स्थिति में कमी आ जाती है। यानी यदि वह शुभ फल देने वाला है, तो पूर्ण शुभ फल नहीं दे पाता है। यदि अशुभ फल देने वाला है, तो उसके अशुभ फल देने में कमी आ जाती है। सूर्य के समीप आने पर छहों ग्रह अस्त हो जाते हैं, लेकिन राहु और केतु कभी अस्त नहीं होते हैं। इतने करीब होने पर होते हैं अस्त ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, चंद्रमा सूर्य के दोनों ओर 12 डिग्री या इससे अधिक करीब आने पर अस्त माने जाते हैं। वहीं, सूर्य के दोनों ओर 11 डिग्री या इससे अधिक समीप आने पर गुरू अस्त माने जाते हैं। शुक्र, सूर्य के दोनों ओर 10 डिग्री या इससे अधिक समीप आने पर अस्त माने जाते हैं। वक्री शुक्र यदि सूर्य के दोनों ओर 8 डिग्री या इससे अधिक करीब हो, तो अस्त माना जाता है। सूर्य के दोनों ओर 14 डिग्री या इससे अधिक समीप आने पर बुध अस्त माने जाते हैं। वक्री बुध यदि सूर्य के दोनों ओर 12 डिग्री या इससे अधिक करीब हो, तो अस्त माने जाते हैं। सूर्य के दोनों ओर 15 डिग्री या इससे अधिक समीप आने पर शनि अस्त माने जाते हैं। अतिरिक्त बल देने की जरूरत अस्त ग्रहों सही फल दें, इसके लिए उन्हें अतिरिक्त बल देने की जरूरत होती है। कुंडली के आधार पर यह निर्णय किया जाता है कि अस्त ग्रह को अतिरिक्त बल कैसे प्रदान किया जा सकता है। यदि वह ग्रह शुभ फल देने वाला है, तो उसे अतिरिक्त बल प्रदान करना चाहिए। इसके लिए जातक को संबंधित ग्रह का रत्न धारण करवाया जाता है। हालांकि, यदि किसी अस्त ग्रह अशुभ फल देने वाला है या अकारक है, तो उसे अतिरिक्त बल नहीं देना चाहिए। इस स्थिति में संबंधित ग्रह का रत्न नहीं पहनाना चाहिए। इस स्थिति में उस ग्रह के मंत्र, बीज मंत्र या सामान्य पूजा से उसे ठीक करना चाहिए।

 आकाश मंडल में कोई भी ग्रह जब सूर्य से एक निश्चित दूरी के अंदर आ जाता है, तो सूर्य के तेज से वह ग्रह अपनी शक्ति खोने लगता है। इसे ही ग्रह का अस्त होना माना जाता है। जब कोई ...

Read More »

अक्षय तृतीया से फिर बजेंगी शहनाई, दिसंबर तक 41 विवाह मुहूर्त

भोपाल। 14 मार्च को खरमास लगने के साथ ही शादियों समेत अन्य शुभ कार्यों पर लगा विराम 14 अप्रैल को खत्म होने जा रहा है। इसके बाद 18 अप्रैल से सर्वार्थ सिद्धि योग में आ रही अक्षय तृतीया के अबूझ मुहूर्त से एक बार फिर शहनाइयां बजना शुरू होंगी। 14 अप्रैल के अगले तीन दिन तक विवाह के श्रेष्ठ मुहूर्त नहीं हैं, इसलिए विवाह कार्य 18 अप्रैल से ही शुरू हो रहे हैं। गौरतलब है कि 14 अप्रैल तक मीन संक्रांति का खरमास होने से शादियों एवं अन्य शुभ कार्य के लिए श्रेष्ठ मुहूर्त नहीं मना जाता है। अप्रैल से जुलाई तक इस बार विभिन्न तारीखों में शादी के लिए कई श्रेष्ठ मुहूर्त आएंगे। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार 18 अप्रैल को अक्षय तृतीया से पहले एक भी श्रेष्ठ मुहूर्त नहीं है। पंडित रामजीवन दुबे के मुताबिक अक्षय तृतीया भी खास है, क्योंकि इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 6.06 से रात 8.10 बजे तक रहेगा। इसमें शादियां ही नहीं बाजार से खरीदारी भी शुभ रहेगी। सूर्य-चंद्रमा का उच्च राशि होना भी शुभता का प्रतीक है। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक इस साल अप्रैल से दिसंबर तक कुल 41 विवाह मुहूर्त ही बन रहे हैं। 16 मई से 13 जून तक फिर लगेगा विवाहों पर विराम 16 मई से 13 जून तक अधिकमास में शादियों पर एक बार फिर विराम लग जाएगा। अगस्त, सितंबर, अक्टूबर से लेकर 18 नवंबर तक शादियां बंद रहेंगी। देव उठनी एकादशी 19 नवंबर को भी शादियों का मुहूर्त नहीं रहेगा। नवंबर माह में शुक्र मार्गी होकर पुनः अस्त हो जाएगा। 21 जुलाई भड़ली नवमी एवं 23 जुलाई को देव शयनी एकादशी को शादियां नहीं होंगी। इन तारीखों में गूंजेगी शहनाई अप्रैल- 18, 19, 20, 24, 25, 26, 27, 28, 29, 30, 18 अप्रैल अक्षय तृतीया को अबूझ मुहूर्त है। - मई- 1, 2, 3, 4, 5, 6, 11, 12, 13 (16 मई से 13 जून तक अधिमास में शादियां बंद रहेंगी) - जून - 14, 18, 20, 21, 23, 25, 27, 28, 29, 30 विवाह मुहूर्त। - जुलाई - 4, 5, 6, 9, 10, 11, 15, 16 (21 भड़ली नवमी एवं 23 जुलाई से देवशयनी एकादशी) - नवंबर- शादियां नहीं होंगी - दिसंबर-8, 10, 11, 15 विवाह मुहूर्त। - अबूझ मुहूर्त में होंगे सैंकड़ों विवाह 18 अप्रैल को अक्षय तृतीया व अबूझ मुहूर्त पर शहर में विभिन्ना समाजों द्वारा सामूहिक विवाह सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। इनमें सैंकड़ों जोड़ों का विवाह संपन्ना होगा। एयरपोर्ट रोड स्थित आसाराम बापू आश्रम में ब्राह्मण समाज समिति द्वारा सर्व ब्राह्मण समाज का विवाह सम्मेलन आयोजित किया जाएगा, जिसमें 51 जोड़ों का विवाह होगा। विवाह सम्मेलन के अध्यक्ष गौरी शंकर काका व रमेश विरथरिया होंगे। पंडित जगदीश शर्मा ने बताया कि अबूझ मुहूर्त में शहर में सैंकड़ों शादियां होने जा रही हैं, जिसके कारण विवाह संपन्ना कराने वाले वैदिक ब्राह्मणों को अन्य जिलों से आमंत्रित किया जा रहा है। कोलार रोड स्थित पाहाड़ा वाली माता पर भी विवाह सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इसके साथ ही श्यामला हिल्स स्थित टैगोर छात्रावास खेल मैदान में भी सामूहिक विवाह सम्मेलन होगा। उमाशंकर गुप्ता के संरक्षण व नया भोपाल क्षेत्र जनकल्याण समिति के तत्वावधान में यह सम्मेलन होगा, जिसमें 51 सर्वजातीय जोड़ों का विवाह कराया जाएगा। विवाह सम्मेलन संयोजक शैलेन्द्र निगम ने बताया कि सम्मेलन से एक दिन पूर्व सभी कन्याओं की हल्दी, तेल, महंदी रस्म पूरी की जाएगी व महिला संगीत का आयोजन भी किया जाएगा। 18 अप्रैल सुबह 10 बजे सभी 51 दूल्हे सजकर घोड़ी पर सवार होंगे। जो पालीटेक्निक चौराहा स्थित गांधी भवन बारात लेकर सम्मेलन स्थल पर पहुंचेंगे। इसके अलावा रातीबड़, करोंद सहित कई कई समाजों के विवाह सम्मेलन अबूझ मुहूर्त में आयोजित किए जाएंगे।

 14 मार्च को खरमास लगने के साथ ही शादियों समेत अन्य शुभ कार्यों पर लगा विराम 14 अप्रैल को खत्म होने जा रहा है। इसके बाद 18 अप्रैल से सर्वार्थ सिद्धि योग में आ रही अक्षय तृतीया के अबूझ मुहूर्त ...

Read More »