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धर्म-कर्म

आज है गंगा दशहरा, सुबह-सुबह गंगा दशहरा पर करें ये काम

आज है गंगा दशहरा। ज्येष्ठ शुक्ल दशमी तिथि को मनाया जाता है गंगा दशहरा। ऐसी मान्यता है कि इस दिन गंगा मां का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था।  ऐसा भी माना जाता है कि गंगा श्री विष्णु के चरणों में रहती थीं ...

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महाभारत के इस योद्धा से कृष्ण भी हो गए थे भयभीत, एक तीर से जितवा देता युद्ध

जब भी महाभारत की बात होती है तो पांडव और कौरवों मे अनेक योद्धाओं के पराक्रम और शौर्य की गाथाओं की चर्चा होती है जैसे भीम, कर्ण, अर्जुन और दुर्योधन की, लेकिन शायद आप नहीं जानते कि इन सभी महा बलशालियों के ...

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जब पूजा का नारियल निकल जाए खराब…मतलब भगवान ने दिए हैं ये संकेत

क्या कभी आपके साथ भी ऐसा हुआ है कि आपने जो नारियल पूजा में चढ़ाया था वो अंदर में खराब निकल गया हो। कभी न कभी तो जरूर हुआ होगा और जब हुआ होगा तो आपको दुकानदार पर गुस्सा आने ...

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सक्सेस मंत्र: हर सफल व्यक्ति में होती हैं ये 5 बातें

हम जानते हैं कि यदि हमें कुछ पाना है तो इसके लिए कुछ करना भी होगा। लेकिन कुछ ऐसी बातें सभी सफल लोग अपनाते जो आपको सफल होने के काबिल बनाती हैं। भले ही इन बातों से आपको सीधे तौर ...

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मोहिनी एकादशी का व्रत एवं महत्व

समुद्र मंथन के समय देव संग्राम को समाप्त करने के लिए जब भगवान विष्णु ने अति मनमोहक स्त्री का रूप धारण करके देवताओ को अमृत पान करवाया पर राक्षसों को नहीं . उस दिन एकादशी तिथि होने के कारण इस दिन ...

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सोमवार को भगवान शिव और गणेशजी की एक साथ करें पूजा ,जरूर पूरी होगी मनोकामना

हिन्दू शास्त्रों के अनुसार सोमवार को भगवान शिव की पूजा करने का दिन माना जाता है। इस समय भगवान शिव और गौरी के पुत्रभगवान गणेश जी के जन्मदिन के अवसर पर उनका उत्सव पूरे जोश के साथ मनाया जा रहा है। ...

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दबा हुआ धन वापस पाना है तो अक्षय तृतीया के दिन घर में लाएं ये एक चीज, बरसेगी मां लक्ष्मी की कृपा

बैशाख मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया यानी18 अप्रैल को मां लक्ष्मी विशेष कृपा बरसाएंगी। बस ये एक काम करें… पंडित संतराम के मुताबिक, इस दिन घर की साफ-सफाई करके मां लक्ष्मी का पूजन बहुत ही शुभ फलदायी होता है। ...

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अक्षय तृतीया पर भूलकर भी ना करें ये 5 गलतियां वरना माता लक्ष्मी हो जाएंगी नाराज

अक्षय तृतीया को सबसे शुभ दिनों में से एक माना जाता है। इस बार 18 अप्रैल को यह पर्व मनाया जाएगा। इस त्योहार पर माता लक्ष्मी की कृपा पाने का सबसे अच्छा समय होता है। माता लक्ष्मी इस दिन अपने ...

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क्या अस्त ग्रह फल भी देते हैं, जानें कैसे करें उन्हें बलशाली

मल्टीमीडिया डेस्क। आकाश मंडल में कोई भी ग्रह जब सूर्य से एक निश्चित दूरी के अंदर आ जाता है, तो सूर्य के तेज से वह ग्रह अपनी शक्ति खोने लगता है। इसे ही ग्रह का अस्त होना माना जाता है। जब कोई ग्रह अस्त हो जाता है, तो उसके फल देने की स्थिति में कमी आ जाती है। यानी यदि वह शुभ फल देने वाला है, तो पूर्ण शुभ फल नहीं दे पाता है। यदि अशुभ फल देने वाला है, तो उसके अशुभ फल देने में कमी आ जाती है। सूर्य के समीप आने पर छहों ग्रह अस्त हो जाते हैं, लेकिन राहु और केतु कभी अस्त नहीं होते हैं। इतने करीब होने पर होते हैं अस्त ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, चंद्रमा सूर्य के दोनों ओर 12 डिग्री या इससे अधिक करीब आने पर अस्त माने जाते हैं। वहीं, सूर्य के दोनों ओर 11 डिग्री या इससे अधिक समीप आने पर गुरू अस्त माने जाते हैं। शुक्र, सूर्य के दोनों ओर 10 डिग्री या इससे अधिक समीप आने पर अस्त माने जाते हैं। वक्री शुक्र यदि सूर्य के दोनों ओर 8 डिग्री या इससे अधिक करीब हो, तो अस्त माना जाता है। सूर्य के दोनों ओर 14 डिग्री या इससे अधिक समीप आने पर बुध अस्त माने जाते हैं। वक्री बुध यदि सूर्य के दोनों ओर 12 डिग्री या इससे अधिक करीब हो, तो अस्त माने जाते हैं। सूर्य के दोनों ओर 15 डिग्री या इससे अधिक समीप आने पर शनि अस्त माने जाते हैं। अतिरिक्त बल देने की जरूरत अस्त ग्रहों सही फल दें, इसके लिए उन्हें अतिरिक्त बल देने की जरूरत होती है। कुंडली के आधार पर यह निर्णय किया जाता है कि अस्त ग्रह को अतिरिक्त बल कैसे प्रदान किया जा सकता है। यदि वह ग्रह शुभ फल देने वाला है, तो उसे अतिरिक्त बल प्रदान करना चाहिए। इसके लिए जातक को संबंधित ग्रह का रत्न धारण करवाया जाता है। हालांकि, यदि किसी अस्त ग्रह अशुभ फल देने वाला है या अकारक है, तो उसे अतिरिक्त बल नहीं देना चाहिए। इस स्थिति में संबंधित ग्रह का रत्न नहीं पहनाना चाहिए। इस स्थिति में उस ग्रह के मंत्र, बीज मंत्र या सामान्य पूजा से उसे ठीक करना चाहिए।

 आकाश मंडल में कोई भी ग्रह जब सूर्य से एक निश्चित दूरी के अंदर आ जाता है, तो सूर्य के तेज से वह ग्रह अपनी शक्ति खोने लगता है। इसे ही ग्रह का अस्त होना माना जाता है। जब कोई ...

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क्या अस्त ग्रह फल भी देते हैं, जानें कैसे करें उन्हें बलशाली

मल्टीमीडिया डेस्क। आकाश मंडल में कोई भी ग्रह जब सूर्य से एक निश्चित दूरी के अंदर आ जाता है, तो सूर्य के तेज से वह ग्रह अपनी शक्ति खोने लगता है। इसे ही ग्रह का अस्त होना माना जाता है। जब कोई ग्रह अस्त हो जाता है, तो उसके फल देने की स्थिति में कमी आ जाती है। यानी यदि वह शुभ फल देने वाला है, तो पूर्ण शुभ फल नहीं दे पाता है। यदि अशुभ फल देने वाला है, तो उसके अशुभ फल देने में कमी आ जाती है। सूर्य के समीप आने पर छहों ग्रह अस्त हो जाते हैं, लेकिन राहु और केतु कभी अस्त नहीं होते हैं। इतने करीब होने पर होते हैं अस्त ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, चंद्रमा सूर्य के दोनों ओर 12 डिग्री या इससे अधिक करीब आने पर अस्त माने जाते हैं। वहीं, सूर्य के दोनों ओर 11 डिग्री या इससे अधिक समीप आने पर गुरू अस्त माने जाते हैं। शुक्र, सूर्य के दोनों ओर 10 डिग्री या इससे अधिक समीप आने पर अस्त माने जाते हैं। वक्री शुक्र यदि सूर्य के दोनों ओर 8 डिग्री या इससे अधिक करीब हो, तो अस्त माना जाता है। सूर्य के दोनों ओर 14 डिग्री या इससे अधिक समीप आने पर बुध अस्त माने जाते हैं। वक्री बुध यदि सूर्य के दोनों ओर 12 डिग्री या इससे अधिक करीब हो, तो अस्त माने जाते हैं। सूर्य के दोनों ओर 15 डिग्री या इससे अधिक समीप आने पर शनि अस्त माने जाते हैं। अतिरिक्त बल देने की जरूरत अस्त ग्रहों सही फल दें, इसके लिए उन्हें अतिरिक्त बल देने की जरूरत होती है। कुंडली के आधार पर यह निर्णय किया जाता है कि अस्त ग्रह को अतिरिक्त बल कैसे प्रदान किया जा सकता है। यदि वह ग्रह शुभ फल देने वाला है, तो उसे अतिरिक्त बल प्रदान करना चाहिए। इसके लिए जातक को संबंधित ग्रह का रत्न धारण करवाया जाता है। हालांकि, यदि किसी अस्त ग्रह अशुभ फल देने वाला है या अकारक है, तो उसे अतिरिक्त बल नहीं देना चाहिए। इस स्थिति में संबंधित ग्रह का रत्न नहीं पहनाना चाहिए। इस स्थिति में उस ग्रह के मंत्र, बीज मंत्र या सामान्य पूजा से उसे ठीक करना चाहिए।

 आकाश मंडल में कोई भी ग्रह जब सूर्य से एक निश्चित दूरी के अंदर आ जाता है, तो सूर्य के तेज से वह ग्रह अपनी शक्ति खोने लगता है। इसे ही ग्रह का अस्त होना माना जाता है। जब कोई ...

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