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राष्ट्रीय

यूपी की कानून व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त: हाईकोर्ट

उन्नाव: देश में बलात्कार की घटनाएं बढ़ती ही जा रही है, कभी सरकार पक्ष के किसी नेता के ऊपर बलात्कार का आरोप लगता है तो कहीं सरकार पक्ष के कुछ नेता बलात्कार में छोटी बच्ची के आरोपियों के समर्थन में तिरंगे लेकर रैलियां करते है, इन्हीं घटनाओं के साथ आज उन्नाव रेप केस में इलाहबाद हाईकोर्ट में बहस के बाद अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है. इलाहबाद कोर्ट ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है जिसे कल यानी शुक्रवार को 2 बजे सुनाया जाएगा. हाईकोर्ट ने उत्तरप्रदेश की योगी सरकार को लताड़ लगाकर कहा कि सरकार जनता के लिए है या आरोपियों के संरक्षण के लिए? कोर्ट की आज हुई कार्यवाही में राज्य सरकार पर कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की साथ ही ये भी कहा कि यूपी में कानून व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है. इससे पहले हुई कोर्ट की बहस में योगी सरकार ने अपने विधायक को बचाने की पूरी कोशिश की, साथ ही सरकार की तरफ से साफ मना कर दिया गया कि बलात्कार में पीड़िता ने जिस विधायक पर आरोप लगाए है उन आरोपों के लिए पर्याप्त सबूत नहीं है जिसके कारण विधायक को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता. मामले की जांच SIT के बाद अब CBI के पास है देखते है इस केस में आगे क्या निकल कर आता है.

उन्नाव: देश में बलात्कार की घटनाएं बढ़ती ही जा रही है, कभी सरकार पक्ष के किसी नेता के ऊपर बलात्कार का आरोप लगता है तो कहीं सरकार पक्ष के कुछ नेता बलात्कार में छोटी बच्ची के आरोपियों के समर्थन में ...

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उन्नाव गैंगरेप : चौतरफा दबाव के बाद बीजेपी विधायक हिरासत में

उन्नाव: गैंगरेप मामले में सीबीआई ने आरोपी बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को हिरासत में लिया है. इस मामले की जांच कर रही सीबीआई ने शुक्रवार तड़के बीजेपी विधायक को घर से हिरासत में लिया. बता दें, केंद्र ने उत्तर प्रदेश सरकार की सिफारिश मंजूर करते हुए गुरुवार की शाम इस केस की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी से कराने का आदेश जारी किया था. इससे पहले हाई कोर्ट की फटकार के बाद पुलिस ने आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था. एफआईआर दर्ज होने के बाद पीड़ित लड़की की बहन ने आरोपी विधायक की गिरफ्तारी की मांग की थी. उन्होंने मांग करते हुए कहा कि मेरे पिता को मारने वाले और इस साजिश को रचने वालों को फांसी होनी चाहिए. बता दें, चौतरफा दबाव के बाद यूपी सरकार ने इस मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश की थी, जिसे केंद्र ने मंजूर कर लिया था. बता दें, गृह विभाग ने पीड़िता के पिता की मौत की जांच की सिफारिश भी सीबीआई से की है. इस मामले में उन्नाव जिला अस्पताल के 2 डॉक्टर सस्पेंड किए गए हैं. इसके अलावा जेल अस्पताल के भी तीन डॉक्टरों पर गाज गिरी है. इनपर पीड़िता के पिता के इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप है. वहीं, सीओ सफीपुर कुंवर बहादुर सिंह भी लापरवाही के आरोप में सस्पेंड किए गए हैं. बता दें, इस मामले में लापरवाही बरतने को लेकर यूपी सरकार सबके निशाने पर है. विधायक सेंगर ने कहा था कि, 'जांच रिपोर्ट में क्या है, मुझे नहीं मालूम. एसआइटी रिपोर्ट में क्या-क्या मामले आए हैं, इसका मुझे कुछ नहीं पता. यह कहा जा रहा है कि मैं भाग गया हूं, फरार हो गया हूं. इसलिए मैं यह दिखाना चाहता हूं कि मैं जनता का आदमी और जनता के बीच में हूं. इसीलिए मैं सामने आ रहा हूं.' विधायक ने कहा कि, 'मुझे रेप का आरोपी बनाया गया है. मैं ये सपने में भी नहीं सोच सकता. मेरे खिलाफ साजिश की गई है. मेरा मीडिया ट्रायल किया गया है. मैं साजिश का शिकार हुआ हूं. मैं चाहता था कि निष्पक्ष जांच हो. मैंने कभी किसी पर दबाव नहीं बनाया. अगर मैं दोषी हूं या मेरा भाई गुनहगार है तो सजा मिलेगी. कानून के तहत सबको सजा मिलनी चाहिए. मैंने कोई गलत काम नहीं किया है. मेरे खिलाफ दुष्प्रचार किया गया. जो लोग आज चैनलों पर बातें कर रहे हैं, उनका कृत्य किसी ने नहीं देखा.'

 गैंगरेप मामले में सीबीआई ने आरोपी बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को हिरासत में लिया है. इस मामले की जांच कर रही सीबीआई ने शुक्रवार तड़के बीजेपी विधायक को घर से हिरासत में लिया. बता दें,  केंद्र ने उत्तर प्रदेश ...

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डॉ. नजमा हेपतुल्ला का जन्मदिन आज

डॉ. नजमा हेपतुल्ला एक राजनीतिज्ञ, लेखिका है. इनका जन्म 13 अप्रैल 1940 को मध्यप्रदेश के भोपाल के राजनिक परिवार में हुआ. डॉ. हेपतुल्ला को राजनीति विरासत में मिली है. रिश्ते में मौलाना अबुल कलाम आजाद की नातिन हेपतुल्ला ने एमएससी करने के बाद हृदय रोग विज्ञान में पीएचडी प्राप्त की पर राजनीति में दिलचस्पी के कारण वह राजनीति में आई. हेपतुल्ला एक राजनीतिज्ञ, लेखिका और नरेन्द्र मोदी सरकार के अंतर्गत अल्पसंख्यक मामलों की मंत्री थी. फिलहाल वह मणिपुर राज्य की राज्यपाल है. वह मुंबई कांग्रेस कमेटी की महासचिव और उपाध्यक्ष रह चुकी हैं. वह 1985 से 1986 तथा 1988 से जुलाई 2007 तक भारतीय लोकतंत्र की उपरी प्रतिनिधि राज्यसभा की पूर्व उपसभापति रही हैं. 1980 से राज्यसभा की सदस्य है और अभी उनको दिल्ली के जमियामालिया इस्लामिया का चांसलर नियुक्त किया गया है. हेपतुल्ला के पति और प्रसिद्घ मानव संसाधन सलाहकार अकबर अली ए. हेपतुल्ला का निधन हो चुका है. उनकी 3 बेटियां हैं जो अमेरिका में काम करती हैं. हेपतुल्ला ने मुंबई प्रदेश कांग्रेस कमेटी की महासचिव से अपना राजनीतिक जीवन शुरू किया, तत्पश्चात उन्होंने उपाध्यक्ष का उत्तरदायित्व भी निभाया। वे 1980 से राज्यसभा की सदस्य हैं. सदन की कार्यवाही का कुशल संचालन किया और सत्तापक्ष तथा विपक्ष में भी लोकप्रिय बनी रहीं. लेकिन श्रीमती सोनिया गाँधी से उनके रिश्तों में आई खटास के बाद वह भाजपा में शामिल हो गई. डॉ॰ हेपतुल्ला भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद की अध्यक्ष भी रहीं हैं. सन 2004 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने भाजपा का दामन पकड़ लिया. वे जुलाई 2004 में दोबारा राज्यसभा के लिए भाजपा के टिकट पर चुनी गईं. वे भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सदस्य भी बनाई गईं. पर वर्ष 2007 में वह उपराष्ट्रपति के चुनाव में हामिद अंसारी से 233 वोटों से हार गई थीं. इन्होंने 26 मई 2014 को नरेंद्र मोदी मंत्रिमंडल में केंद्रीय मंत्री के रूप में शपथ ली. अल्पसंख्यक मामलों की केंद्रीय मंत्री नजमा हेपतुल्ला ने मोदी कैबिनेट से इस्तीफा देना पड़ा था. अल्पसंख्यक मामले की केंद्रीय मंत्री नजमा हेपतुल्ला ने 12 जुलाई 2016 को मोदी कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया. केंद्रीय कैबिनेट में वह सबसे उम्रदराज मंत्री थीं. वह 75 साल पार कर चुके मंत्रियों में शामिल थीं. डॉ. नजमा हेपतुल्ला को 17 अगस्त 2016 को मणिपुर का राज्यपाल नियुक्त किया गया था. हालांही में हेपतुल्ला को सर्वसम्मति से जामिया मिल्लिया इस्लामिया का चांसलर (अमीर-ए-जामिया) नियुक्त किया गया है.

डॉ. नजमा हेपतुल्ला एक राजनीतिज्ञ, लेखिका है. इनका जन्म 13 अप्रैल 1940 को मध्यप्रदेश के भोपाल के राजनिक परिवार में हुआ. डॉ. हेपतुल्ला को राजनीति विरासत में मिली है. रिश्ते में मौलाना अबुल कलाम आजाद की नातिन हेपतुल्ला ने एमएससी ...

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बीजेपी की मुखर महिला मंत्रियों की फौज उन्नाव-कठुआ पर मौन

दिल्ली : बीजेपी के राज में बढ़ते गैंगरेप और महिलाओं और बच्चियों पर अत्याचार के पर पीएम नरेंद्र मोदी, बीजेपी और यहाँ तक की बीजेपी की वे महिला नेता जो हर मौके पर बयानबाजी और बीजेपी की तरफदारी करते नहीं थकती है, इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए है. सु-शासन का ढिंढोरा पीटने वाली केंद्र सरकार और उसकी महिला नेता गैंगरेप की दो बड़ी घटनाओं पर मौन है. इन वारदातों ने सरकार के झूठे वादों को फिर एक बार बेनकाब किया है. यूपी के उन्नाव में तो बीजेपी का विधायक ही रेप और फिर पीड़ित के पिता की हत्या का मुख्य आरोपी है. वहीं, जम्मू-कश्मीर के कठुआ में आठ साल की बच्ची के साथ गैंगरेप के बाद हत्या की जघन्य घटना पर बॉलीवुड समेत पूरा देश आक्रोश जता रहा है. यूपी में जहां बीजेपी की खुद की सरकार है, वहीं जम्मू और कश्मीर में पीडीपी के साथ बीजेपी की गठबंधन सरकार है. हैरानी की बात है कि महिला सुरक्षा के मुद्दे पर हमेशा मुखर रहने वालीं बीजेपी की कई महिला मंत्री भी उन्नाव और कठुआ की घटनाओं को लेकर गुरुवार को बैकफुट पर नजर आईं. केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी को बीजेपी में मुखर और ओजस्वी वक्ताओं में माना जाता है. स्मृति दिल्ली के हनुमान मंदिर में बीजेपी के उपवास के लिए आईं थीं. ये उपवास कांग्रेस की ओर से संसद नहीं चलने देने के विरोध में बीजेपी ने रखा था. मगर कठुआ और उन्नाव में गैंगरेप की घटनाओं पर जब स्मृति ईरानी की प्रतिक्रिया जाननी चाही तो उन्होंने मौन रहना ही बेहतर समझा. बार-बार सवाल पूछे जाने पर भी स्मृति ईरानी ने इन घटनाओं पर एक शब्द नहीं बोला और कार में बैठकर रवाना हो गईं. कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में बीजेपी के शासन को ‘रावणराज’ तक का नाम दे डाला है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट में सवाल किया है कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महिलाओं पर अत्याचार और बीजेपी शासित राज्यों में कानून और व्यवस्था की खराब स्थिति के विरोध में उपवास रखेंगे. मोदी सरकार की एक और मंत्री उमा भारती, केंद्रीय महिला और बाल कल्याण मंत्री मेनका गांधी, केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज महिलाओं से जुड़े इस मुद्दे पर मौन क्यों है समझ से परे है. वही बीजेपी सांसद मीनाक्षी लेखी को विपक्ष के इस मुद्दे पर बोलने से भी एतराज है और खुद अभी भी सरकार की तरफदारी करती नज़र आ रही है.

 बीजेपी के राज में बढ़ते गैंगरेप और महिलाओं और बच्चियों पर अत्याचार के पर पीएम नरेंद्र मोदी, बीजेपी और यहाँ तक की बीजेपी की वे महिला नेता जो हर मौके पर बयानबाजी और बीजेपी की तरफदारी करते नहीं थकती है, ...

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डिफेंस एक्सपो में PM बोले- शांति के साथ लोगों की सुरक्षा हमारा लक्ष्य

आपको बता दें कि लगभग 150 अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शकों सहित 670 से भी ज्यादा प्रदर्शक डिफेंस एक्सपो में शिरकत करेंगे. इस वर्ष सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र का लगभग 15 प्रतिशत का समुचित प्रतिनिधित्व होगा. भारतीय प्रतिभागियों में कई प्रमुख कंपनियां जैसे कि टाटा, कल्याणी, भारत फोर्ज, महिन्द्रा, एमकेयू, डीआरडीओ, एचएएल, बीईएल, बीडीएल, एमडीएल, जीआरएसई, जीएसएल, एचएसएल, आयुध कारखाने शामिल हैं. डिफेंस एक्सपो-2018 में भाग लेने वाली प्रमुख अंतरराष्ट्रीय कंपनियों में लॉकहीड मार्टिन, बोइंग (अमेरिका), एसएएबी (स्वीडन), एयरबस, राफेल (फ्रांस), यूनाइटेड शिपबिल्डिंग (रूस), बीएई सिस्टम्स (ब्रिटेन), सिबत (इस्राइल), वार्टसिला (फिनलैंड), रहोड एंड श्वार्ज (जर्मनी) शामिल हैं. प्रधानमंत्री चेन्नई के अड्यार स्थित कैंसर संस्थान का भी दौरा करेंगे. प्रधानमंत्री इस अवसर पर हीरक जयंती भवन, श्रीपेरंबदूर स्थित उपशामक देखभाल केंद्र (महावीर आश्रय) और अड्यार कैंसर संस्थान स्थित डे केयर सेंटर एवं नर्सो के क्वार्टर का उद्घाटन करने वाली पट्टिका का अनावरण करेंगे.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज तमिलनाडु के चेन्नई में डिफेंस एक्सपो में रक्षा प्रदर्शनी का उद्घाटन किया. इस वर्ष डिफेंस एक्सपो की थीम ‘भारत-उभरता रक्षा विनिर्माण हब’ है. प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज ये ...

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किस काम की तकनीक? जकरबर्ग बोले- लीक का पता अखबार पढ़कर चला

सोशल मीडिया दिग्गज फेसबुक के सीईओ मार्क जकरबर्ग आज दूसरे दिन अमेरिकी कांग्रेस के सामने हाजिर हुए हैं. यहां फिर उनसे तीखे सवाल पूछे जा रहे हैं. जैसा कि हमने आपको पहले भी बताया है कि जकरबर्ग कैंब्रिज एनालिटिका डेटा लीक के मामले पर सवालों से घिरे हैं. इस दौरान एक सवाल के जवाब में कहा कि कभी-कभी फेसबुक से जुड़ी घटनाओं के संदर्भ में जानकारियां उन्हें प्रेस से मिलती हैं. दरअसल सवाल जवाब के दूसरे दिन की कड़ी में जब अमेरिकी सांसदों ने सवाल किया- फेसबुक के पास एडवांस्ड डेटा प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी है. इसके बावजूद क्या आपको ऐसे स्कैंडल्स के बारे में प्रेस से पता चलता है? एलेग्जेंडर कोगन ने आपके यूजर डेटा को एक एजेंसी को बेच देता है, तब भी आपको भनक नहीं लगती? हम आपके वादों पर भरोसा क्यों करें जब आप लगातार ऐसा कर रहे हैं? जवाब में जकरबर्ग ने कहा कि हां, 2015 में पहली बार हमें गार्डियन की रिपोर्ट के बाद कैम्ब्रिज एनालिटिका के बारे में पता चला था. कई बार हमें इस तरह के उल्लंघन के बारे में प्रेस से पता चलता है. गौरतलब है कि, 2015 में कोगन ने डेटा अपने ऐप के जरिए डेटा इकट्ठा किया था और ये जानकारियां कोगन ने कैम्ब्रिज एनालिटिका को दे दी थी. लेकिन फेसबुक ने दिसंबर 2015 में गार्डियन की रिपोर्ट सामने आने के बाद उस पर कार्रवाई शुरू किया था. इसके अलावा भी जकरबर्ग जब पूछा गया कि क्या फेसबुक के पास ऐसी तकनीक है जिससे वो पता लगा सकते हैं कि कोई बाहरी ताकत इलेक्शन को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है. जवाब में जकरबर्ग ने कहा कि, 2016 चुनाव के बाद से कंपनी इस पर लगातार काम कर रही है, ताकि आने वाले समय में ऐसा न हो और रूस जैसी कोई बाहरी ताकत चुनाव को प्रभावित ना कर सके.

सोशल मीडिया दिग्गज फेसबुक के सीईओ मार्क जकरबर्ग आज दूसरे दिन अमेरिकी कांग्रेस के सामने हाजिर हुए हैं. यहां फिर उनसे तीखे सवाल पूछे जा रहे हैं. जैसा कि हमने आपको पहले भी बताया है कि जकरबर्ग कैंब्रिज एनालिटिका डेटा ...

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बंगाल पंचायत चुनाव हिंसा: TMC के दो गुटों की लड़ाई में दो की मौत

उत्तरी 24 परगना जिले में विजय जुलूस के दौरान बुधवार को सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस में संदिग्ध गुटीय लड़ाई में दो व्यक्तियों की मौत हो गयी. पुलिस ने इसकी जानकारी दी. जिले के सासन इलाके में फाल्ती ग्राम पंचायत में पार्टी उम्मीदवार की निर्विरोध जीत के बाद रैली निकाली गई थी. पार्टी के स्थानीय नेता सैफर रहमान (52) जब रैली में चल रहे थे तो तब उन पर चाकू से हमला किया गया. उनको बारासात में एक अस्पताल में ले जाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया. पुलिस ने बताया कि स्थानीय लोगों ने तृणमूल कांग्रेस के 40 वर्षीय कार्यकर्ता रजब अली को यह आरोप लगाते हुए स्थानीय लोगों ने पीट-पीटकर मार डाला कि उसने रहमान की हत्या की है. बहरहाल, राज्य में पंचायत चुनाव नामांकन को लेकर कई जगह हिंसक घटनाएं हुई हैं. पश्चिम बंगाल राज्य निर्वाचन आयोग ने पलटा फैसला इससे पहले मंगलवार को अपने ही फैसले को पलटते हुए हुए पश्चिम बंगाल राज्य निर्वाचन आयोग ने राज्य में अगले महीने होने वाले पंचायत चुनावों के लिए नामांकन-पत्र दाखिल करने की बढ़ी हुई समय सीमा वापस ले ली. इस बीच, विपक्षी पार्टियों ने आरोप लगाया कि राज्य निर्वाचन आयोग को सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस ने समय सीमा बढ़ाने के पिछले आदेश को रद्द करने के लिए मजबूर किया है. आयोग के सूत्रों ने बताया कि राज्य निर्वाचन आयुक्त एके सिंह ने पूर्व के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें पंचायत चुनावों में नामांकन-पत्र दाखिल करने की अवधि बढायी गयी थी. सुप्रीम कोर्ट पहुंची बीजेपी बीजेपी की पश्चिम बंगाल इकाई ने निर्वाचन आयोग की ओर से अपना ही फैसला वापस लेने के निर्णय के कुछ ही घंटों के भीतर शीर्ष न्यायालय का रुख किया. कलकत्ता उच्च न्यायालय ने भी राज्य निर्वाचन आयोग के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी. बीजेपी नेता प्रताप बंद्योपाध्याय ने आयोग के फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी है. पहले से जारी काम थम जाने पर वकीलों के विरोध के मद्देनजर न्यायमूर्ति सुब्रत तालुकदार ने अपने चैंबर में याचिकाकर्ता और उनके विरोधी का पक्ष सुना. न्यायमूर्ति तालुकदार के चैंबर से बाहर आकर बंद्योपाध्याय ने कहा कि न्यायालय ने निर्वाचन आयोग के आदेश को रद्द करने के आयोग के ही फरमान पर अंतरिम रोक लगा दी है और कहा कि मामले की अगली सुनवाई 23 अप्रैल को होगी. मई के पहले हफ्ते में होगी वोटिंग इस मामले से जुड़े सभी पक्षों से कहा गया है कि वे हलफनामे दाखिल करके अपना रुख स्पष्ट करें. तृणमूल कांग्रेस की तरफ से पेश हुए पार्टी सांसद और वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी ने कहा कि न्यायालय ने आदेश पर रोक भले ही लगा दी है, लेकिन उसने चुनावी प्रक्रिया में दखल देने से इनकार किया है. पंचायत चुनाव एक, तीन और पांच मई को तीन चरणों में कराए जाएंगे. राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से जारी नई अधिसूचना में कहा गया, ‘‘ऐसा लगता है कि नामांकन की तारीख बढ़ाने के लिए उच्चतम न्यायालय की ओर से कोई विशिष्ट निर्देश नहीं दिए गए हैं. लिहाजा, सभी दस्तावेजों के अध्ययन और सभी बिंदुओं पर विचार करने के बाद आयोग उस आदेश को वापस लेता है और ( पिछला) आदेश रद्द करता है.’’ एक, तीन और पांच मई को होने वाले पंचायत चुनावों के लिए नामांकन- पत्र दाखिल करने की आखिरी तारीख 9 अप्रैल थी, जबकि आयोग ने इसकी अवधि 10 अप्रैल तक के लिए बढ़ा दी थी. आयोग ने इन शिकायतों के बाद नामांकन दाखिल करने की अवधि बढ़ाई थी कि विपक्षी उम्मीदवारों को पर्चा दाखिल करने से रोका गया. नयी अधिसूचना के अनुसार, निर्वाचन आयुक्त को राज्य सरकार के विशेष सचिव और तृणमूल कांग्रेस की तरफ से दो पत्र मिले. इन दोनों पत्रों में आयोग के पहले के आदेश में कानून की विसंगतियों का हवाला दिया गया था. बीजेपी नेता दिलीप घोष ने लगाया आरोप प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष दिलीप घोष ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग पर दबाव बनाया कि वह अपना पिछला आदेश वापस ले. राज्य विधानसभा में माकपा के नेता सुजान चक्रवर्ती ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग को कोई आजादी नहीं है और राज्य के मंत्रियों ने उस पर दबाव डाला है. विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए तृणमूल सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि विपक्षी पार्टियों के नेताओं ने आयोग पर दबाव बनाया था कि वह समयसीमा बढ़ाने का ‘‘अवैध आदेश’’ दे.

उत्तरी 24 परगना जिले में विजय जुलूस के दौरान बुधवार को सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस में संदिग्ध गुटीय लड़ाई में दो व्यक्तियों की मौत हो गयी. पुलिस ने इसकी जानकारी दी. जिले के सासन इलाके में फाल्ती ग्राम पंचायत में पार्टी ...

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विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के खिलाफ FIR, पढ़ें गुरुवार सुबह की 5 बड़ी खबरें

सोशल मीडिया दिग्गज फेसबुक के सीईओ मार्क जकरबर्ग आज दूसरे दिन अमेरिकी कांग्रेस के सामने हाजिर हुए हैं. यहां फिर उनसे तीखे सवाल पूछे जा रहे हैं. जैसा कि हमने आपको पहले भी बताया है कि जकरबर्ग कैंब्रिज एनालिटिका डेटा लीक के मामले पर सवालों से घिरे हैं. इस दौरान एक सवाल के जवाब में कहा कि कभी-कभी फेसबुक से जुड़ी घटनाओं के संदर्भ में जानकारियां उन्हें प्रेस से मिलती हैं. 5. इसरो ने लॉन्‍च किया स्वदेशी नेविगेशन सैटेलाइट IRNSS-1I भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अपना नेविगेशन सैटेलाइट (IRNSS-1I) गुरुवार सुबह लॉन्च कर दिया. इस सैटेलाइट को पीएसएलवी-सी41 रॉकेट के जरिए गुरुवार सुबह 4.04 बजे आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के एफएलपी से लॉन्च किया गया. बता दें, IRNSS-1I स्वदेशी तकनीक से निर्मित नेविगेशन सैटेलाइट है.

उन्नाव गैंगरेप मामले में आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के खिलाफ FIR दर्ज. वहीं, इस पूरे मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश भी कर दी गई है. एक साथ तीन रिपोर्ट मिलने के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर  ...

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जस्ट‍िस कुरियन का CJI को लेटर- सुप्रीम कोर्ट का अस्तित्व खतरे में, इतिहास हमें माफ नहीं करेगा

सु‍प्रीम कोर्ट का अस्तित्व खतरे में है और यदि जजों की नियुक्ति के मामले में सरकार की चुप्पी पर कोर्ट कुछ नहीं करता है तो इतिहास हमें माफ नहीं करेगा. जस्टिस कुरियन जोसेफ ने भारत के चीफ जस्ट‍िस (CJI) को लिखे एक नए पत्र में यह बात कही है. इससे देश की न्यायिक व्यवस्था में एक बार फिर विवाद शुरू होने और सरकार तथा सुप्रीम कोर्ट के बीच एक तरह का टकराव शुरू होने की आशंका है. इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, जस्ट‍िस कुरियन जोसेफ ने इस लेटर में लिखा है, 'कोलेजियम द्वारा एक जज और एक वरिष्ठ वकील को तरक्की देकर सर्वोच्च न्यायालय में लाने की सिफारिश को दबा कर बैठे रहने के सरकार के अभूतपूर्व कदम पर यदि कोर्ट ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी तो इतिहास हमें माफ नहीं करेगा.' असल में जस्ट‍िस कुरियन कोलेजियम के फरवरी के उस निर्णय का हवाला दे रहे हैं जिसमें वरिष्ठ वकील इंदु मल्होत्रा और उत्तराखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्ट‍िस के.एम. जोसेफ को सुप्रीम कोर्ट में जज बनाने की सिफारिश की गई है. सरकार और सुप्रीम कोर्ट में टकराव की राह! इस लेटर में काफी जोरदार शब्दों में अपील करते हुए जस्ट‍िस कुरियन जोसफे ने कहा है, 'पहली बार इस अदालत के इतिहास में ऐसा हुआ है कि किसी सिफारिश पर तीन महीने बाद तक यह पता नहीं चल पा रहा है कि उसका क्या हुआ.' उन्होंने CJI से कहा कि इस मसले पर स्वत: संज्ञान लेते हुए सात वरिष्ठ जजों की बेंच के द्वारा सुनवाई की जाए. उनकी यह मांग अगर मान ली जाती है तो सात जजों की पीठ सरकार को कोलेजियम की लंबित सिफारिशों पर तत्काल निर्णय लेने का आदेश दे सकती है. इसके बाद भी सरकार अगर ऐसा नहीं करती तो उसे न्यायिक अवमानना मानी जाएगी. जस्ट‍िस कुरियन ने इस लेटर की कॉपी सुप्रीम कोर्ट के 22 अन्य जजों को भी भेजी है. गौरतलब है कि इसके पहले गत 12 जनवरी को जस्ट‍िस कुरियन जोसेफ सहित चार जजों ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर CJI की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे.

सु‍प्रीम कोर्ट का अस्तित्व खतरे में है और यदि जजों की नियुक्ति के मामले में सरकार की चुप्पी पर कोर्ट कुछ नहीं करता है तो इतिहास हमें माफ नहीं करेगा. जस्टिस कुरियन जोसेफ ने भारत के चीफ जस्ट‍िस (CJI) को ...

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पांच राज्यों के भीतर माल ढुलाई के लिए E Way Bill 15 अप्रैल से

नई दिल्ली। राज्य के भीतर यानी इंट्रा-स्टेट माल की ढुलाई के लिए 15 अप्रैल से ई-वे बिल की आवश्यकता होगी। इसकी शुरुआत फिलहाल पांच राज्यों से हो रही है। एक राज्य से दूसरे राज्य में सामान ले जाने के लिए ई-वे बिल पहली अप्रैल से अनिवार्य हो चुका है। वित्त मंत्रालय ने मंगलवार को जारी बयान में कहा है कि राज्य की सीमा के भीतर भी पचास हजार रुपये से अधिक की कीमत का माल ले जाने के लिए ई-वे बिल की आवश्यकता होगी। पहले चरण में जिन पांच राज्यों से इसकी शुरुआत हो रही है उनमें उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गुजरात और केरल शामिल हैं। मंत्रालय का मानना है कि इन राज्यों में ई-वे बिल लागू होने के बाद कारोबारियों को माल ढुलाई में और सहूलियत होगी। इन राज्यों के ट्रांसपोर्टरों, कारोबारियों और उद्योगों को ई-वे बिल पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन या नामांकन कराना होगा। एक राज्य से दूसरे राज्य में माल की ढुलाई के लिए पहली अप्रैल से लागू होने के बाद सोमवार तक 63 लाख ई-वे बिल जेनरेट किये गये। कर्नाटक अकेला राज्य था जिसने पहली अप्रैल से ही राज्य के भीतर माल ढुलाई के लिए ई-वे बिल की व्यवस्था लागू कर दी थी। पिछले महीने ही जीएसटी काउंसिल ने देश में ई-वे बिल की व्यवस्था चरणबद्ध तरीके से लागू करने का फैसला किया था। इसके तहत ही पहली अप्रैल से एक राज्य से दूसरे राज्य में माल की ढुलाई के लिए ईवे बिल की व्यवस्था लागू की गई थी। और अब 15 अप्रैल से राज्यों के भीतर सामान की आवाजाही के लिए इसकी शुरुआत हो रही है। सरकार का मानना है कि ई-वे बिल की व्यवस्था लागू होने से न केवल टैक्स की चोरी रुकेगी बल्कि सरकार के राजस्व में वृद्धि होगी क्योंकि इससे अब तक नकदी की व्यवस्था के तहत हो रहा काम बंद हो जाएगा। ई-वे बिल की व्यवस्था को पहले एक फरवरी से लागू किया गया था। लेकिन सिस्टम में आई गड़बड़ी के चलते इसे टाल दिया गया था।

 राज्य के भीतर यानी इंट्रा-स्टेट माल की ढुलाई के लिए 15 अप्रैल से ई-वे बिल की आवश्यकता होगी। इसकी शुरुआत फिलहाल पांच राज्यों से हो रही है। एक राज्य से दूसरे राज्य में सामान ले जाने के लिए ई-वे बिल ...

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