40 के पार हर तीसरे शख्स में ‘पौरुष’ की कमी

देश में 40 साल से अधिक उम्र का हर तीसरा व्यक्ति सेक्सुअल हॉर्मोन की कमी से जूझ रहा है। यानी हर तीसरा व्यक्ति टेस्टोस्टेरोन डिफिसिएंसी सिंड्रोम (टीडीएस) से पीड़ित है। दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल ने 745 लोगों पर किए एक शोध में इस बात का खुलासा किया है। 

शोध में शामिल 60 फीसदी लोग टेस्टोस्टेरोन डिफिसिएंसी सिंड्रोम से पीड़ित थे। टेस्टोस्टेरोन हॉर्मोन पुरुषों में यौन क्षमता बनाए रखता है। किसी पुरुष में इसकी कमी होती है तो सेक्स से जुड़ी कई तरह की परेशानी शुरू हो जाती है। शोध के मुताबिक मधुमेह, हाइपरटेंशन और हार्ट के मरीजों में टीडीएस का खतरा और ज्यादा पाया गया है। 40 साल की उम्र के बाद टेस्टोस्टेरोन में हर साल 0.4 से 2.6 फीसदी की कमी होने लगती है। गंगाराम अस्पताल के यूरोलॉजी विभाग के चेयरमैन डॉक्टर सुधीर चढ्डा के मुताबिक,  शोध में पाया गया कि जिन लोगों को मधुमेह नहीं था उनमें टीडीएस कम पाया गया। मधुमेह वाले लोगों में यह बहुत अधिक था। 

इलाज संभव 

डॉक्टर ने कहा कि ऐसे लोग जिनकी उम्र ज्यादा है और वे डायबिटीज, हार्ट डिजीज, बीपी, विटामिन डी की कमी से जूझ रहे हैं उन्हें हर साल टीडीएस की जांच करानी चाहिए। इस बारे में डॉक्टर मृणाल पहवा ने कहा कि लोग अभी भी सामाजिक बंधन की वजह से डॉक्टर के पास आने से परहेज करते हैं, जबकि यह एक प्रकार की बीमारी है और इसका इलाज संभव है। पुरुषों में इसका इलाज हॉर्मोन बदलाव से संभव है।

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