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हरी-भरी मकई स्वाद से भरी, जानें इससे जुड़ी कुछ रोचक बातें

बारिश की पहली बौछार के साथ कोयले के अंगारों पर सड़क किनारे सिके भुट्टे ललचाने लगते हैं। कुछ फिरंगी मिजाज के दोस्त उबले भुट्टों पर मक्खन लगाकर इनका आनंद लेने की सलाह देते हैं। खाना चाहे जैसा हो, इसका साथ मजा दोगुना कर ही देता है।
बकौल पुराने हिंदी फिल्मी गाने के जो ‘हरी थी भरी थी दुशाला ओढ़े खड़ी थी’ वह और कोई नहीं मक्की शहजादी ही थी। बहुत कम लोगों को इसकी जानकारी है कि यह हरदिल अजीज अनाज, करीब पांच सौ साल पहले पुर्तगालियों के साथ भारत पहुंचा था। इसकी जन्मभूमि है ‘मेक्सिको’ जहां के जनजीवन में इसकी सांस्कृतिक अहमियत है। इससे बनाए जाने वाले रोटीनुमा तोर्तिया और अधखुली भरवा गुजिया की याद दिलाने वाले नाचोज और टाकोज अब भारत में भी नजर आने लगे हैं। इसका एक दूसरा रूप ‘पोलेंता’ वाला है, जिसे आप सेके हुए व्यंजन की तरह खा और खिला सकते हैं।
वैसे कुछ देश-प्रेमी इतिहासकार इस दावे कोे चुनौती देते हैं। मकई के स्वदेशी संतान होने के दावे के पक्ष में वह ग्वालियर दुर्ग की तलहटी में निर्मित गूजरी रानी के महल के संग्रहालय की एक सातवीं-आठवीं सदी की मूर्ति को पेश करते हैं। इसमें एक व्यक्ति को भुट्टा हाथ में लिए दिखाया गया है।

पंजाब में मक्के की रोटी का साथ पारंपरिक रूप से सरसों का साग देता है, तो मालवा वालों के लिए मीठी मुलायम मक्के की खीर का मुकाबला कोई भी नहीं कर सकता। बारिश की पहली बौछार के साथ कोयले के अंगारों पर सड़क किनारे सिके भुट्टे ललचाने लगते हैं। कुछ फिरंगी मिजाज के दोस्त उबले भुट्टों पर मक्खन लगाकर इनका आनंद विलायती ‘कॉर्न ऑन कौब’ की शक्ल में लेने की सलाह देते हैं। आयात का सम्मोहन निराला है- जो लोग देशी भडभूजे को रत्ती भर भाव नहीं देते थे, वह भी मल्टीप्लेक्स में फिल्म देखते हुए पॉपकॉर्न का बड़ा-सा टब निपटाने में बिल्कुल भी देर नहीं लगाते।
केएफसी वाले पॉपकॉर्न की चादर ओढ़कर मुर्गे बेचते हैं, तो कुछ रेस्तरां अपनी ‘कॉर्न क्रस्टेड मछली’ पर नाज करते हैं। शाकाहारी नाश्ते में यही आम सीरियल है। संक्षेप में मकई शाकाहारी और मांसाहारी व्यंजनों में अपनी जगह बनाने में कामयाब रही है। जो भूमिका बेसन की भारतीय खानपान में है, कुछ वैसी ही जिम्मेदारी इसे पश्चिम की रसोई में सौंपी जाती रही है।

मकई से मिलने वाले स्टार्च को न भूलें, जिसके बहुविध उपयोग हैं। मकई हमें खाना पकाने का तेल भी देती है और मिठास के लिए सीरप वाला विकल्प भी। मकई के तेल का मेयोनीज और सलाद ड्रेसिंग बनाने में या सब्जियां भूनने के लिए प्रयोग किया जाता है। मकई में अनेक पौष्टिक तत्व संतुलित मात्रा में होते हैं, जिनको अपनी खुराक में हम आसानी से शामिल कर सकते हैं।

नेपाल के गांवों में बिना तामझाम के ‘ढिंडो’ नामक मकई का दलिया भूख मिटाता है। वातानुकूलित मॉल में भी भाप से गर्म चटपटे मकई के दानों की चाट लोकप्रिय हो चुकी है। पंचमेल सब्जी में बेबी कॉर्न के साथ ब्रोकली की जुगलबंदी सधती है। इसी छुटकी मकई के पकौड़े भी कम स्वादिष्ट नहीं होते। वहीं, क्या आप चीनी भोजन का रसास्वादन स्वीट कॉर्न सूप के अभाव में करने की कल्पना कर सकते हैं? मकई के पापड़ का लुत्फ भी हम उठा सकते हैं।राजस्थान में मक्की का सोवेटा पकाया जाता है।

हिमाचल में तो मिंजर मेले का हर्षोल्लास से आयोजन मकई के आभार को प्रकट करने के लिए ही किया जाता है। कुछ ही दिन पहले हमारे एक बहुत अच्छे मित्र ने पहली बार हमें ‘पहाड़ी आर्गेनिक’ नामक रिजॉर्ट में मकई का चीला चखाया, जो वास्तव में नायाब था। हमारे नौजवान सेलिब्रिटी शेफ दोस्त ने कुुदरती रंगीन मकई के दानों का इस्तेमाल एक शाकाहारी बिरयानी में किया है और अब इससे अनोखी खीर बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

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