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सरायकाले खां के पास नीरज बवानिया गैंग के साथ पुलिस की हुई मुठभेड़

दिल्ली के  सराय काले खां इलाके में मिलेनियम पार्क के पास नीरज बवानिया गैंग के बदमाशों और पुलिस के बीच मुठभेड़ हुई। जिसमें एक बदमाश सद्दाम को पैर में गोली लगी। घायल बदमाश को अस्‍पताल में भर्ती कराया गया है। हालांकि बवानिया गैंग का सदस्‍य नवीन भांजा भागने में सफल हुआ। नवीन भांजा कोटलामुबारकपुर में 4 दिन पहले गोली चली थी उसमे और कुछ केस में वांटेड था, पुलिस को पता लगा कि ये बाईक पर आने वाला है उसी दौरान इसे पकड़ने की कोशिश हुई।

पुलिस के मुताबिक, कुछ बदमाश नीरज बवानिया और उसके सहयोगी नवीन भांजा का नाम लेकर दक्षिणी दिल्ली के कारोबारी को धमकाते थे। डराने के लिए यूट्यूब पर इनका प्रोफ़ाइल भी दिखाते थे, जिसमें लिखा होता ‘दिल्ली का दाऊद’ और फिर 20 से 30 लाख की डिमांड करते थे। डर के मारे लोग पुलिस तक शिकायत लेकर नहीं आते थे। नहीं करते। जांच में पुलिस को यह भी पता चला था कि नवीन भांजा वॉट्सऐप कॉल से सीधा बिजनसमैन को डराता था और पैसे नहीं देने के बदले गोली खाने की धमकी देता था।

कौन है नीरज बवानिया, कैसे बना डॉन?
नीरज का जन्म 1988 में दिल्ली के बवाना इलाके में हुआ, उसके पिता डीटीसी कंडक्टर थे। नीरज ने पहली बार 19 साल की उम्र में जुर्म की दुनिया में कदम रखा तो फिर पीछे मुड़ कर नहीं देखा। वह जुर्म के रास्ते पर तेजी से बढ़ा, लेकिन उस समय दिल्ली का डॉन नीतू दाबोदा उसके रास्ते का कांटा था। नीतू दाबोदा गैंग के अलावा तब पारस गैंग, कर्मबीर गैंग का भी बोल-बाला था।

साल 2013 में दिल्ली पुलिस ने नीतू दाबोदा को एक एनकाउंटर में मार दिया, उसके बाद नीरज का रास्ता साफ हो गया और उसने दिल्ली का डॉन बनने की ठान ली, लेकिन चालाक नीरज पुलिस से सीधे तौर पर टकराव नहीं चाहता था।

डॉन का ‘शौकीन’ कनेक्शन

नीरज ने अपने मामा और पूर्व एमएलए रामवीर शौकीन का हाथ थामा। पुलिस के मुताबिक, नीरज ने मामा की चुनावी जमीन तैयार करने के लिए अवैध तरीकों से कमाया गया पैसा जमकर खर्च किया और उसका मामा उसे राजनीतिक संरक्षण देता रहा  और कई बार उसने वारादात के बाद घर में पनाह भी दी। दिल्ली विधान सभा चुनाव से पहले फरवरी 2015 में रामबीर शौकीन की पत्नी को चुनाव में मदद करने के लिए आए नीरज बबाना गैंग के नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया था।

कांट्रेक्ट किलिंग और प्रोटेक्शन मनी का धंधा

मामा का साथ मिला तो नीरज ने अपने गैंग में दर्जनों मेंबर जोड़े। इस दौरान वह दूसरे गैंग के बदमाशों को खत्म करने का काम भी करता रहा। सुपारी लेकर हत्या करना, जबरन वसूली, सट्टा और जुए के धंधे में उसकी तूती बोलने लगी। पश्चिमी, उत्तरी पश्चिमी और बाहरी दिल्ली में उसका ऐसा दबदबा हो गया कि लोग उसकी शिकायत करने से भी कतराने लगे।

इसके बाद वह DSIDC के ऑफिस से भी रंगदारी वसूलता था। रियल स्टेट से भी उसने जमकर पैसा कमाया। साल 2013 में दिल्ली से कांग्रेस MLA जसवंत राणा से भी 50 लाख की फिरौती मांगी, तब राणा ने उसके खिलाफ मामला दर्ज कराया और इसे लेकर कई विधायकों ने मुख्यमंत्री से शिकायत भी की।

पांच राज्यों तक फैला जाल

नीरज बवाना धीरे-धीरे दिल्ली से बाहर हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड में भी अपराध करने लगा। उसके गैंग के लोग जिस राज्य में पकड़े जाते वहां जेल जाते ही दूसरे अपराधियों से दोस्ती गांठकर वहीं से फिरौती का धंधा करने लगे। पिछले साल दिसंबर में उसने बागपत में पेशी के लिए आए अमित उर्फ भूरा को उत्तराखंड पुलिस की कस्टडी से छुड़ा लिया और पुलिस की दो AK-47 राइफल और एक SLR भी लूट ली। इसके बाद वह कोलकता भाग गया और वहां एक किराए के फ्लैट में रहा। पुलिस ने उसके पास से दो विदेशी पिस्टल बरामद की हैं।

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