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रिपोर्ट के मुताबिक चमगादड़ नहीं है निपाह वायरस का मुख्य कारण

निपाह वायरस का रहस्य और भी गहराता जा रहा है। इससे अब तक 12 लोगों की जान जा चुकी है जबकि 20 लोग इससे अभी भी प्रभावित हैं। निपाह वायरस को लेकर अब तक कहा जा रहा था कि यह चमगादड़ के कारण फैल रहा है। लेकिन वायरस पर आई एक रिपोर्ट के मुताबिक इस संक्रमण के फैलने के मुख्य कारण चमगादड़ नहीं हैं। यह रिपोर्ट शुक्रवार को आई है।

 अधिकारियों का कहना है कि वह अब मोहम्मद साबिथ (26) के बारे में ये पता करेंगे कि उसने किन जगहों की यात्रा की थी। बता दें साबिथ मूसा के घर के ऐसे पहले व्यक्ति थे जिनकी मौत निपाह से हुई थी। साबिथ सहित उनके परिवार में कुल चार लोगों की मौत वायरस से हो चुकी है। साबिथ सऊदी अरब में हेल्पर के तौर पर कार्य करते थे।

जब जांच अधिकारियों को उसके घर में चमगादड़ मिले तो उन्हें लगा कि वायरस के पीछे का कारण चमगादड़ ही हैं। बताया जाता है कि एनआईवी का ट्रांसमिशन संक्रमित चमगादड़, सूअर या अन्य एनआईवी संक्रमित लोगों से सीधे संपर्क में आने से होता है। इसलिए ये सैंपल भेजे गए।

भोपाल में उच्च सुरक्षा पशु रोग प्रयोगशाला में चमगादड़ और सूअरों के कुल 21 नमूने भेजे गए थे। जिनमें सभी के जांच रिपोर्ट नकारात्मक पाए गए हैं। इन नमूनों में चमगादड़ और सूअर के अलावा गाय, बकरी, खरगोश, कुत्ते और बिल्ली के सैंपल भी भेजे गए थे लेकिन उनकी जांच रिपोर्ट भी नकारात्मक पाए गए।

वहीं सप्ताह के शुरु में केंद्रीय पशुपालन आयुक्त एसपी सुरेश की अगुआई वाली एक टीम ने प्रभावित क्षेत्र में जानवरों की जांच के बाद कहा था कि जानवरों में निपाह वायरस से संबंधित कोई भी घटना नहीं पाई गई है। इस वायरस से केवल इंसान ही प्रभावित हैं।

भोपाल में भेजे गए सैंपलों में वह चमगादड़ भी शामिल था जिसे पेरम्बरा गांव के मूसा के घर से लिया गया था। बता दें मूसा के दोनों बेटों और रिश्तेदारों की मौत निपाह वायरस के कारण हुई थी। जानकारी के मुताबिक सभी 21 सैंपल पेरम्बरा और उसके आस पास के इलाके से इकट्ठे किए गए थे।

हाल ही में हुई मौतों के कारण कोझीकोड और मल्लापुरम जिलों के लोग अपने घरों और पशुओं को छोड़ने पर मजबूर हो गए हैं। राज्य सरकार ने शुक्रवार को सभी पार्टियों की एक मीटिंग भी बुलाई। जिसमें यह फैसला लिया गया कि सबसे प्रभावित जिले कोझीकोड में लोगों को जागरुक करने के लिए जुलूस निकाला जाएगा।

इस यात्रा में एक्साइज मंत्री टीपी रामकृष्णन और स्वास्थ्य मंत्री केके शैलेजा भी हिस्सा लेंगे। साथ ही सरकार ने बिजली शवदाह गृह के उन कर्मियों को भी काम से बर्खास्त करने का फैसला किया है जो निपाह पीड़ितों के शवों का अंतिम संस्कार करने से इंकार कर रहे हैं।

अब जब रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि ये वायरस चमगादड़ों से नहीं फैल रहा है तो अधिकारियों ने प्रभावित इलाकों को मद्देनजर रखते हुए जांच आगे बढ़ाने का फैसला किया है।

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