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यूपी: बहुमंजिला भवनों में फ्लैट खरीदार ले सकेंगे अलग बिजली कनेक्शन

बहुमंजिला भवनों में फ्लैट खरीदने वाले अब अपना अलग बिजली कनेक्शन ले सकेंगे। राज्य विद्युत नियामक आयोग ने शुक्रवार को विद्युत वितरण संहिता 2005 में 13वें संशोधन का आदेश जारी कर दिया। आयोग के आदेश के मुताबिक सभी सिंगल प्वाइंट कनेक्शन वाले मल्टी स्टोरी भवनों को 31 मार्च 2019 तक मल्टीपल कनेक्शन में तब्दील करना होगा ताकि उपभोक्ता सीधे बिजली कंपनी से कनेक्शन ले सकें। आयोग के आदेश के बाद अब राज्य सरकार को इस बाबत अधिसूचना जारी करनी है। आयोग का आदेश सोमवार को शासन को ेजा जाएगा। ऊर्जा विभाग द्वारा अधिसूचना जारी किए जाने की तिथि से नई व्यवस्था प्रभावी हो जाएगी।

प्रदेश में मल्टीस्टोरी भवनों में रहने वालों से बिल्डर अब मनमाना बिजली बिल नहीं वसूल सकेंगे। बिजली बिल को लेकर फ्लैट खरीदार व बिल्डर के बीच विवाद की शिकायतें लगातार बिजली कंपनियों और नियामक आयोग में पहुंच रही थीं। कई फ्लैट खरीदारों ने बिल्डरों के खिलाफ आयोग के साथ-साथ अदालत में भी याचिका दायर कर रखी है। बिजली बिल वसूली में मनमानी पर नोएडा के एक बड़े बिल्डर के खिलाफ एफआईआर तक दर्ज कराई जा चुकी है।

फ्लैट खरीदारों के राहत देने के मकसद से बीते महीने नियामक आयोग के अध्यक्ष राज प्रताप सिंह की अध्यक्षता में सप्लाई कोड रिव्यू पैनल सब कमेटी की बैठक हुई थी जिसमें उन्हें अलग कनेक्शन देने के लिए वितरण संहिता में संशोधन का फैसला किया गया था। आयोग की पूर्ण पीठ अध्यक्ष राज प्रताप सिंह, सदस्य एस.के. अग्रवाल व के.के. शर्मा ने शुक्रवार को इस संबंध में आदेश किया। आयोग के इस फैसले से जहां नए फ्लैट खरीदारों को काफी राहत मिलेगी वहीं अभी तक सिंगल प्वाइंट कनेक्शन से बिजली का इस्तेमाल कर रहे पुराने लोग भी बिल्डरों के  चंगुल से मुक्त हो जाएंगे।

स्मार्ट प्री-पेड मीटर के जरिये दिए जाएंगे कनेक्शन
सिंगल प्वाइंट कनेक्शन की व्यवस्था होने के बाद अब मल्टी स्टोरी भवनों में फ्लैट खरीददारों को स्मार्ट प्री-पेड मीटर लगाकर नए कनेक्शन दिए जाएंगे। आयोग ने अपने आदेश में इस बाबत भी बिजली कंपनियों को निर्देश दिए हैं। आयोग के संज्ञान में लाया गया था कि बिल्डर सिंगल प्वाइंट कनेक्शन लेकर फ्लैट में रहने वालों से 20-25 रुपये प्रति यूनिट तक की दर से बिल की वसूली करते हैं। यही नहीं बिल्डर मीटर से छेड़छाड़ करके बिजली चोरी भी करते हैं। अलग से जमानत राशि जमा कराकर भी उपभोक्ताओं का शोषण किया जाता है।

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