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यह घरेलू नुस्‍खे अपनाकर प्रियंका की तरह आप भी पा सकते हैं अस्‍थमा पर काबू

मौसम में बदलाव के साथ ही सांस और गले की बीमारी के शिकार लोगों की परेशानी शुरू हो सकती है। यह समय और अब इसके बाद सर्दियों का मौसम दमा के मरीजों के लिए मुश्‍किल समय होता है। दमा के मरीजों को खास सर्तकता बरतनी पड़ती है। अभी हाल ही में बॉलीवुड स्‍टार प्रियंका चोपड़ा ने अपने दमा का मरीज होने का खुलासा कर सबको चौंका दिया था।

प्रियंका की ही तरह आप भी कुछ घरेलू नुस्‍खों की मदद से अस्‍थमा पर काबू पा सकते हैं। यहां हम कुछ ऐसे ही घरेलू नुस्‍खे आपको बता रहे हैं, जिन्‍हें अपनाकर अस्‍थमा के मरीज राहत पा सकते हैं। आइए जानते हैं इन्‍हें

बड़े काम केे हैं ये नुस्‍खे
  • तुलसी के 20 पत्तों को पानी से धो कर फिर उन पर कालीमिर्च पाउडर छिड़क कर खाने से श्वास रोग से आराम मिलता है।
  • छिलके सहित एक केले को हल्की आंच पर भुन लें। फिर इस केले का छिलका उतार कर इस पर काली मिर्च का पाउडर डालकर खाना दमा रोग में लाभकरी होता है।
  • दमा रोग होने पर एक चम्मच हल्दी और दो चम्मच शहद को मिलाकर चाटने से असरदार फ़ायदा नज़र आता है।
  • तुलसी के पत्तों का पेस्ट दो चम्मच शहद के साथ मिलाकर सेवन करने से अस्थमा रोग के प्रभाव को काम किया जा सकता है।
अंजीर से साफ होगा बलगम
  • 10 ग्राम मेथी के बीज को एक गिलास पानी मे उबाल लें और जब पककर तीसरा हिस्सा रह जाएं तो ठंडा करके इसे पी लें। यह दमा रोग का सरल उपाय अनेकों रोगों में फ़यदेमंद है।
  • चार सूखे अंजीर को रात में पानी मे भिगों कर सुबह खाली पेट सेवन करने से श्वास नली में जमा बलगम धीरे धीरे बाहर निकलने लगता है। जिससे दमा रोगी को राहत मिलती है।
  • अस्थमा रोग की रामबाण औषधि सहजन की पत्तियों को उबालकर छान लें और उसमें चुटकी भर नमक, एक चौथाई नींबू का रस और काली मिर्च पाउडर मिलाकर पी लें। कुछ ही दिनों में लाभ दिखने लगेगा।
लहसुन भी करता है फायदा
  • शहद एक ऐसी औषधि है जिसकी सुगंध ही दमा रोगी को फ़ायदा पहुँचाती है। इसके लिए एक शहद भरे बर्तन को रोगी के नाक के नीचे रखें और शहद की गंध श्वास के साथ लें, इससे दमा में राहत मिलती है।
  • लहसुन की 10 कली को 100 मिली दूध में उबाल लें और इस मिश्रण को सुबह-शाम लेने से दमा रोगी के स्वास्थ्य को लाभ मिलता है।
  • आंवला एक  उपयोगी जड़ी बूटी है। इसकी एक चम्मच आंवला रस मे दो चम्मच शहद मिलाकर लेने से फेफड़े ताकतवर बनते हैं और धीरे धीरे यह रोग गायब हो जाता है।
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