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मोदी सरकार के लिए नाक सवाल है उपसभापति का चुनाव

संसद का शीतकालीन सत्र 10 अगस्त तक प्रस्तावित है और इससे ठीक एक दिन पहले सभापति एम वेंकैया नायडू ने उपसभापति के चुनाव की घोषणा कर दी है। सही माने में यह चुनाव मोदी सरकार (एनडीए) के लिए नाक कासवाल है। एनडीए पहले ही राज्यसभा की पॉरफुल लोकलेखा समिति में एक हार का सामना कर चुका है। इस चुनाव में एनडीए के प्रत्याशी जद(यू) के हरबंश नारायण सिंह को विपक्षी दलों के प्रत्याशी सीएम रमेश से हार का सामना करना पड़ा है। ऐसे में जहां एक बार फिर उपभसभापति के चुनाव में एनडीए के प्रत्याशी की हार तय मानी जा रही है, वहीं सत्ता पक्ष इस पद को हासिल करने पर पूरा जोर लगा रहा है।

कौन हो सकता है प्रत्याशी

एनडीए की तरफ से जद(यू) के हरिबंश नारायण सिंह को उपसभापति पद के लिए फिर मैदान में उतारने की संभावना है। उनका नाम चर्चा में पहले स्थान पर है। कल नामांकन का आखिरी दिन है और समझा जा रहा है किआज शाम तक नाम फाइनल हो जाएगा। भाजपा संसदीय दल की बैठक मंगलवार को सुबह 9.30 बजे हो रही है। इस बैठक में भी उपसभापति के प्रत्याशी के नाम पर मुहर लग सकती है। यही स्थिति विपक्ष की तरफ से भी है।

तृणमूल कांग्रेस के सुखेन्दु शेखर राय ने पहले ही विपक्ष का संयुक्त उम्मीदवार उतारने की वकालत कर दी है। कांग्रेस पार्टी भी चाहती है कि कोई महत्वाकांक्षा न पालते हुए पहले उपसभापति के पद पर विपक्ष के उम्मीदवार को विजय हासिल हो। ऐसे में अभी डीएमके के तिरुचि शिवा और एनसीपी की वंदना शिवा का नाम सबसे आगे हैं। सोमवार को उपसभापति के प्रत्याशी को लेकर संसद भवन में गुलाम नबी आजाद ने विपक्ष के नेताओं से मंत्रणाभी की थी। उम्मीद है कि मंगलवार को विपक्ष भी अपने उम्मीदवार का नाम फाइनल करके उससे नामांकन दाखिल करा देगा।

विपक्षी एकजुटता बनाम सरकार की नाक

राजसभा के उपसभापति का चुनाव जहां सरकार के लिए नाक का सवाल है, वहीं विपक्ष के लिए एकजुटता साबित करने की चुनौती भी। केन्द्र सरकार के पास राज्यसभा में बहुमत नहीं है। 244 सदस्यीय सदन में 223 मतहासिल करने वाला ही सदन का उपसभापति होगा। इस लिहाज सा भाजपा के पास मतों का टोटा है। उसकी उम्मीद जनता दल(बीजू), एआईएडीएमके

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