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भाजपा की चुनावी जमीन मजबूत करने में जुटा संघ, दलित-पिछड़ों पर जोर

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भी अगले वर्ष प्रयाग कुंभ के सहारे सरोकारों के समीकरण संवारकर भाजपा की चुनावी जमीन मजबूत बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। वैसे संघ और भाजपा इसे सांस्कृतिक सरोकारों के प्रति समर्पण बताते हैं, पर मकसद दलितों और पिछड़ों को लामबंद कर हिंदुओं को एकजुट करना भी नजर आ रहा है, जिससे गठबंधन के गणित से पार पाया जा सके।

भाजपा ने जहां पांच वैचारिक कुंभ से प्रयाग कुंभ के सरोकारों से जुड़ने और समीकरणों को दुरुस्त करने की तैयारी की है तो संघ नवंबर और दिसंबर में प्रदेश में पांच स्थानों पर सरोकार कुंभ करेगा। साथ ही रक्षाबंधन से कुंभ तक पड़ने वाले त्योहारों और पर्वों को भी दलितों और पिछड़ों से संवाद बढ़ाने का जरिया बनाने का फैसला किया गया है।

संघ का सपना 2019  के लोकसभा चुनाव में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की विजय है जिससे राष्ट्रवाद के एजेंडे पर बाकी काम भी पूरे हो जाएं। संयोग है कि हिंदुत्व के सांस्कृतिक सरोकारों का प्रतीक कुंभ इस बार तब है जब लोकसभा चुनाव की रणभेरी बज चुकी होगी।

कुंभ में देश के सभी हिस्सों से प्रमुख संत और धर्माचार्य शामिल होते हैं। इसीलिए संघ और भाजपा ने कुंभ के सहारे अपने सरोकारों का संदेश देने की तैयारी की है, जिससे उसकी बात देशभर में पहुंच जाए।

उपचुनाव के नतीजों के बाद भगवा टोली के दिमाग में गठबंधन का गणित बेचैनी मचाए है। इसीलिए उसकी कोशिश है कि सरोकारों के सहारे दलितों और पिछड़ों की लामबंदी हो। विश्व हिंदू परिषद ने रक्षाबंधन पर्व के सहारे दलितों और पिछड़ों से रिश्ते की डोर मजबूत करने की तैयारी की है।

विहिप प्रवक्ता शरद शर्मा बताते हैं कि ‘समन्वय सूत्र बंधन’ कार्यक्रम के तहत विहिप के लोग दलित बस्तियों में जाकर रक्षासूत्र बांधेंगे। संकल्प लेंगे कि पूरा हिंदू समाज एक है। संघ के उत्सवों में रक्षाबंधन पहले से शामिल है। इस बार उसने भी इसे दलितों और पिछड़ों से रिश्तों की डोर मजबूत करने का जरिया बनाया है।

पिछले दिनों संघ के सह सरकार्यवाह सुरेश सोनी का यह कहना कि हिंदू समाज की समस्या ‘कौन हूं? कहां से हूं? किस जिले से हूं?’ है। कार्यकर्ता इसे दूर कर हिंदू समाज को एकजुट करें, संघ की चिंता बताता है।

प्रयास इस तरह भी

संघ ने सेवा भारती को सामाजिक समरसता सद्भाव यात्रा के जरिये भी दलितों को मुख्यधारा से जोड़ने की जिम्मेदारी सौंपी है। यात्रा के साथ चल रहे लोग और साधु-महात्मा दलितों को हिंदू समाज का अभिन्न हिस्सा बताकर बरगलाने वालों से उन्हें सावधान करेंगे। वे दलितों तथा पिछड़ों के साथ भोजन करेंगे। उनकी समस्याओं और शंकाओं का निवारण के साथ उन्हें प्रयाग कुंभ का न्यौता भी देंगे। इन परिवारों के दिव्यांग या रोगी सदस्य को मदद भी दी जाएगी।

इन आयोजनों की भी तैयारी

भाऊराव देवरस सेवा न्यास की तरफ से कुंभ के दौरान चिकित्सा एवं सेवा शिविर लगाने की तैयारी है। सेवा भारती, सेवा कुंभ से दलितों को अपनेपन का एहसास कराएगा। साहित्य परिषद की तरफ से साहित्य कुंभ के जरिये भावी पीढ़ी को कुंभ के महत्व और सरोकारों की जानकारी देने की कोशिश होगी।

दिव्यांगों को सहायक उपकरण दिए जाएंगे तो दलितों व पिछड़ों और गरीबों की आंखों के ऑपरेशन का भी एक बड़ा शिविर कुंभ के दौरान प्रयाग में लगेगा। भाजपा ने पहले ही पांच वैचारिक कुंभ करके प्रयाग कुंभ के सरोकारों से खुद को जोड़कर संदेश देने की तैयारी कर ली है।

भाजपा के प्रदेश महामंत्री विजय बहादुर पाठक कहते भी हैं, हमारी पार्टी का मुद्दा वैसे तो विकास है, पर संस्कृति, परंपरा, विरासत और पहचान भी हमारे लिए महत्वपूर्ण है। कुंभ हमारी परंपराओं और आस्था से जुड़ा और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है।

कुंभ के सहारे हम यह बताना चाहते हैं कि हिंदुत्व दर्शन और संस्कृति में ऊंच-नीच और छुआछूत नहीं है। मानव समाज का कल्याण ही हिंदुत्व का लक्ष्य है। इसीलिए कुंभ का दिव्य और भव्य आयोजन हमारे लिए भावात्मक मुद्दा है।

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