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भगवान विश्वकर्मा की पूजा से होती है व्यापार में दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की, यहां पढ़ें पूजा से जुड़ी बातें

भगवान विश्‍वकर्मा को निर्माण का देवता माना जाता है। 17 सितंबर को पूरे देश में विश्‍वकर्मा  जयंती मनाई जाती है। ऐसा कहा जाता है कि उन्‍होंने देवताओं के लिए कई भव्‍य महलों, आलीशान भवनों, हथियारों और सिंघासनों का निर्माण किया था। ज्योतिर्विद पं दिवाकर त्रिपाठी की मानें तो  इस दिन भगवान विश्वकर्मा ने सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा के सातवें धर्मपुत्र के रुप में जन्म लिया था।

विष्णु पुराण में तो भगवान विश्‍वकर्मा को को देव बढ़ई कहा गया है। भगवान विश्वकर्मा को निर्माण और सृजन का देवता माना जाता है, उन्हें दुनिया का सबसे पहला इंजीनियर भी कहा जाता है। ज्योतिर्विद पं दिवाकर त्रिपाठी के अनुसार ऐसा कहा जाता है कि भगवान विश्‍वकर्मा की पूजा करने से व्यापार में दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की होती है।

शुभ मुहूर्त: वैसे तो पूजा दिन में कभी भी अपनी सुविधानुसार करे लेकिन दोपहर 12 बजकर 54 मिनट तक ही पूजा करना ज्यादा शुभ है।

यहां पढ़ें पूजा विधि: 

पूजा करने के लिए सबसे अपनी मशीन को अच्छे से धोकर साफ़ कर लें। अगर धोना मुश्किल है तो अच्छे से पोंढ लें। उसके बाद घर के मंदिर में जाकर विष्णु भगवान और विश्वकर्मा भगवान की पूजा करें और फूल रखकर भगवान और मशीन पर चढ़ाएं।  इसके बाद जरूरी सामग्री जैसे अक्षत, फूल, चंदन, धूप, अगरबत्ती, दही, रोली, सुपारी, रक्षा सूत्र, मिठाई, फल आदि ले आएं और कलश को स्थापित करें और फिर विधि—विधान से क्रमानुसार या फिर अपने पंडितजी के माध्यम से पूजा करें।  पूजा धैर्यपूर्वक करें और सम्पन्न होने के बाद अपने ऑफिस, दुकान या फैक्टरी के साथियों व परिवार के साथ प्रसाद ग्रहण करने के बाद ही पूजा स्थान को छोड़ें।

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