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बलगम में खून आए, सीने में दर्द हो तो टीबी की जांच कराएं

टीबी के मरीजों को इलाज के दौरान दवा के कोर्स को लेकर सतर्क और सजग रहना चाहिए। अगर बीच में ही दवा का कोर्स लेना बंद कर दिया है तो दोबारा टीबी होने की आशंका प्रबल हो जाती है। 

दोबारा टीबी होने पर यह बेहद गंभीर और खतरनाक साबित होता है। ऐसे में गंभीर प्रतिरोधक टीबी हो सकती है। टीबी की दवा का कोर्स छह से नौ महीने तक चलता है। कई बार ऐसा होता है कि मरीज दो या तीन महीने तक दवा खाकर यह तय कर लेते हैं कि बीमारी ठीक हो गई है और ऐसा होता भी है, लेकिन पूरी तरह से बीमारी तभी दूर होती है जब दवा का पूरा कोर्स चलता है। ये बातें वरिष्ठ फिजिशियन सह एड्स, टीबी और हेपेटाइटिस के विशेषज्ञ डॉ. दिवाकर तेजस्वी ने कहीं। डॉ. दिवाकर तेजस्वी ने कहा कि बीच में ही दवा छोड़ने वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है। जो भी टीबी के मरीज हैं, उन्हें दवा का कोर्स पूरा करना पड़ेगा तभी वो पूरी तरह से ठीक हो सकेंगे। 

हेपेटाइटिस का टीका जरूर लगवाएं : बिहार जैसे राज्य में हेपेटाइटिस-बी सबसे ज्यादा कॉमन बीमारी है। यह बीमारी भी एचआईवी वायरस की तरह फैलती है। यह ज्यादातर संक्रमित ब्लड चढ़ाने, निडिल, सीरिंज और सूई के संक्रमण से भी होता है। खासकार चिकित्सा क्षेत्र के वैसे स्वास्थ्य कर्मी जो सूई देते हैं उन्हें भी एक बार जांच करानी चाहिए। हेपेटाइटिस-बी का टीका लेना चाहिए। यह टीका किसी भी उम्र में लिया जा सकता है। वहीं हेपेटाइटिस-ए और ई ज्यादातर गंदगी, अशुद्ध पानी और खान-पान के कारण होता है। डॉ. दिवाकर तेजस्वी ने बताया कि एड्स का इलाज संभव है। संक्रमित दंपती भी सामान्य बच्चे को जन्म दे सकते हैं। पहले से लोगों में जागरूकता अधिक आयी है। 

दो सप्ताह से है खांसी तो कराएं जांच 

दो सप्ताह से अधिक दिनों तक खांसी है तो इसे नजरअंदाज न करें। तत्काल अपने बलगम की जांच कराएं। सरकारी स्वास्थ्य केन्द्रों पर ये सुविधाएं उपलब्ध हैं। फेफड़े में टीबी होने के लक्षण की पहचान करना भी जरूरी है। अगर बलगम में ब्लड आ रहा है, सीने में दर्द हो रहा हो, वजन कम हो रहा हो और शाम को हल्का बुखार भी हो तो इसे गंभीरता से लेते हुए तक्काल चिकित्सक से मिलकर जांच और इलाज कराना चाहिए। टीबी भी कई तरह की होती हैं। फेफड़े की टीबी के मरीज दूसरे के लिए ज्यादा खतरनाक होते हैं, क्योंकि इसका वायरस फैलता है और जो आसपास रहते हैं उन्हें भी चपेट में ले लेता है।

सवाल: लंबे समय से खांसी ठीक नहीं हो रही है? (छपरा से कृष्ण कुमार)

जवाब: पहले भी टीबी के मरीज रह चुके हैं और दवा का कोर्स भी पूरा नहीं किया है। छह महीने तक दवा लेनी चाहिए थी लेकिन आपने तीन महीने के बाद दवा छोड़ दी। बीच में दवा छोड़ने से ही ऐसा हुआ है। बलगम की जांच कराएं। टीबी से डरें नहीं बल्कि सजग रहें। 

सवाल: हेपेटाइटिस-बी पॉजिटिव पाया गया है। (सीवान से सद्दाम हुसैन)

जवाब: क्रोनिक हेपेटाइटिस-बी है। पहले तो अल्ट्रासाउंड, लिवर फंक्शन टेस्ट आदि की जांच करानी होगी। किसी अच्छे चिकित्सक से संपर्क कर इलाज कराएं। छह-छह महीने पर डॉक्टर से सलाह ले सकते हैं। 

सवाल: हेपेटाइटिस का टीका लगवाया था लेकिन फिर से पॉजिटिव आ गया है। (जहानाबाद से सुमन)

जवाब: ऐसा हुआ है तो दो कारण हो सकते हैं। पहला कि जब आपने जांच करायी होगी तो जांच रिपोर्ट गड़बड़ होगी या जब आपने टीकाकरण कराया होगा तो वो ठीक से असर नहीं कर पाया होगा। एक बार फिर से हेपेटाइटिस-बी प्रोफाइल, डीएनए वायरल लोड की जांच करा लें।

सवाल: घर में एक टीबी के मरीज हैं, क्या दूसरे भी प्रभावित हो सकते हैं। (लखीसराय से प्रियांशु राज)

जवाब: फेफड़े के टीबी वाले मरीजों को कई बातों पर ध्यान रखने की जरूरत है। ऐसे मरीजों से दूसरे में संक्रमण होता है। मरीज और घर के अन्य सदस्यों को अपने हिसाब से सतर्क रहना है। मरीज जिस घर में रह रहा है वो हवादार होना चाहिए। जब भी खांसी हो तो मुंह पर कपड़ा जरूर रखें। अगर मरीज तीन से चार सप्ताह तक टीबी की दवा ले चुके हैं तो दूसरे लोगों पर प्रभाव नहीं पड़ता है। 

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