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पीपीपी मोड पर होगा जेवर एयरपोर्ट का निर्माण, कैबिनेट की मंजूरी के बाद शासनादेश जारी

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर एयरपोर्ट) का निर्माण पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत किया जाएगा। कैबिनेट की मंजूरी के बाद शुक्रवार को नागरिक उड्डयन विभाग ने शासनादेश जारी किया है।

मुख्य सचिव अनूपचंद पांडेय ने जेवर एयरपोर्ट के लिए भूमि अधिग्रहण से विस्थापित हुए परिवारों के बच्चों के लिए नए स्थान पर प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय बनाने और महिला एवं बाल विकास विभाग को आंगनबाड़ी केन्द्र बनाने के निर्देश दिए हैं। एयरपोर्ट के लिए अर्जित और अधिग्रहित की गई कृषि भूमि के बराबर बेकार भूमि को कृषि योग्य भूमि में परिवर्तित किया जाएगा।

मुख्य सचिव अनूप चंद्र पांडेय के अनुसार जेवर एयरपोर्ट के लिए भूमि अधिग्रहण के कारण करीब 6 गांवों के लोगों को विस्थापित कर नए स्थान पर बसाया जा रहा है। विस्थापित परिवारों के बच्चों के लिए नए स्थान पर बेसिक शिक्षा परिषद के जरिए नए विद्यालय खोले जाएंगे।  इसी प्रकार भूमि अर्जन और अधिग्रहण से प्रभावित हुए आंगनबाड़ी केन्द्रों की भी वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी। एयरपोर्ट के मार्ग में स्थित राजवाहा, बाजौता राजावाहा, दयानतपुर राजावाह, किशोरपुर अल्पिका और पथवाया नाला को सिंचाई विभाग और जल संसाधन विभाग विस्थापित करेगा।

कराने की मंजूरी दी है। सोमवार को आयोजित कैबिनेट की बैठक नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (नायल) कंपनी को एयरपोर्ट के लिए अर्जित भूमि और भूमि का प्रबंधन 90 वर्षों के लिए लीज पर देने और विकासकर्ता के चयन के अधिकार देने देने की मंजूरी दी गई। एयरपोर्ट के लिए 2300 रुपये प्रति रूपये प्रति वर्गमीटर की दर से 1239.1416 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण के लिए आवश्यक 4500 करोड़ रुपये में से 4500 करोड़ रुपये की प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति भी जारी की है।

सरकारी भूमि और संपत्तियां निशुल्क दी
जेवर एयरपोर्ट की जद में आ रही सरकारी विभागों की भूमि और संपत्तियां निशुल्क नागरिक उड्डयन विभाग को हस्तांतरित करने की जाएगी।

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