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क्या है कोरोनरी आर्टरीज डिजीज, यहां जानें इसके लक्षण, इलाज और जरूरी टेस्ट

धमनियों में रुकावट के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। हालांकि समय रहते ध्यान दिया जाए तो कई तकनीकें व टेस्ट हैं, जो धमनियों के रोगों को बढ़ने से रोकने में मदद कर सकते हैं।
दिल संबंधी रोगों की एक लंबी फेहरिस्त है। एक शोध के अनुसार हार्ट अटैक से भारत में लगभग 23 फीसदी लोगों की मौत हो जाती है, जबकि पड़ोसी देश चीन में यह दर केवल 7 फीसदी है। एम्स और आईसीएमआर द्वारा कराए गए एक अन्य शोध के अनुसार देश में 30 वर्ष से कम उम्र के लोगों में हृदय रोगों का खतरा सबसे तेजी से बढ़ रहा है। बीते 26 वर्षों में ही हृदय रोग में 50 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जिसकी मुख्य वजह आर्टरीज ब्लॉकेज (धमनियों में रुकावट), हाई ब्लड प्रेशर, हाई शुगर, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, खराब जीवनशैली आदि हैं। धमनियों में ब्लॉकेज का खतरा वाकई तेजी से बढ़ा है।

क्या होती हैं आर्टरीज 
आर्टरीज यानी धमनियां। हमारे पूरे शरीर में रक्त संचार धमनियों और नसों के जरिए होता है। धमनियां रक्त को दिल से शरीर के विभिन्न अंगों तक ले जाती हैं। धमनियों की दीवारें मोटी और लचीली होती हैं तथा इनका भीतरी व्यास कम होता है। इनका रंग गुलाबी या चटख लाल होता है और ज्यादा दबाव होने पर इनमें खून झटके के साथ बहता है। हमारे शरीर में मौजूद कुल रक्त का करीब 15 फीसदी अंश धमनियों में हर समय भरा होता है।

क्या होती हैं आर्टरीज 
आर्टरीज यानी धमनियां। हमारे पूरे शरीर में रक्त संचार धमनियों और नसों के जरिए होता है। धमनियां रक्त को दिल से शरीर के विभिन्न अंगों तक ले जाती हैं। धमनियों की दीवारें मोटी और लचीली होती हैं तथा इनका भीतरी व्यास कम होता है। इनका रंग गुलाबी या चटख लाल होता है और ज्यादा दबाव होने पर इनमें खून झटके के साथ बहता है। हमारे शरीर में मौजूद कुल रक्त का करीब 15 फीसदी अंश धमनियों में हर समय भरा होता है।

कोरोनरी आर्टरीज की समस्या 
भारत में बीते 30 वर्षों में कोरोनरी आर्टरीज डिजीज (सीएडी) 300 फीसदी की दर से बढ़ी हैं। दिल की यह बीमारी धमनियों में रुकावट के चलते पनपती है। शहरी लोगों में इसके मामले ज्यादा मिलते हैं। कार्बोहाइड्रेट और रिफाइंड शुगर इसकी बड़ी वजह हैं। दरअसल, धमनियां वे रक्त वाहिकाएं होती हैं, जो ऑक्सीजन तथा अन्य पोषक तत्वों से भरपूर रक्त को शरीर के सभी हिस्सों तक पहुंचाती हैं। इनके जरिए शुद्ध रक्त शरीर के विभिन्न हिस्सों में पहुंचता है। जब इनमें प्लॉक के रूप में कोलेस्ट्रॉल जमा होने लगता है, तब सूजन व दर्द के अलावा दिल की कई अन्य बीमारियां भी बढ़ने लगती हैं।

सीएडी के कारण और लक्षण 
हाई कोलेस्ट्रॉल इसका एक मुख्य कारण है। हाई ब्लड प्रेशर से दिल पर दबाव बढ़ता है, जिससे सीएडी की आशंका बढ़ जाती है। धूम्रपान से भी दिल के रोगों का खतरा बढ़ता है। डायबिटीज या इंसुलिन रजिस्टेंस के अलावा लगातार घंटों बैठे रहना व अनियमित जीवनशैली भी इसकी वजह है। रक्त प्रवाह में रुकावट से आमतौर पर छाती में दर्द, एंजाइना, सांस लेने में परेशानी, घबराहट, अनियमित धड़कन, दिल का तेजी से धड़कना, कमजोरी, चक्कर आना, मतली या अधिक पसीना आने के लक्षण दिखाई देते हैं।

क्या है इलाज 
एंजियोप्लास्टी के जरिए रक्त प्रवाह में सुधार किया जाता है, जिसके लिए स्टेंट लगाए जाते हैं। बाईपास सर्जरी इसका परंपरागत इलाज है। इसके अलावा नई तकनीकें जैसे ओसीटी, आईवीयूएस, आईएफआर भी हैं, जिनसे स्टेंट से बचा जा सकता है। साथ ही लोडिंग डोज का विकल्प भी है। मरीज की स्थिति के अनुसार ही निर्णय लिया जाता है।

एंजियोप्लास्टी के 7-8 घंटे बाद मरीज चल-फिर सकता है। सावधानी के तौर पर कुछ दिनों तक ज्यादा सीढ़ियां नहीं चढ़नी चाहिए। व्यक्ति के लिए जरूरी है कि वह स्वस्थ आहार ले, तनाव न ले और हल्का व्यायाम करे। डॉक्टर द्वारा दिए निर्देशों का पालन करे।

एंजियोग्राफी से पता चलती है रुकावट 
एंजियोग्राफी तकनीक के जरिए मरीज के हाथ या पैर की नसों में एक तार डाला जाता है। इस तार के जरिए नसों में एक दवा पहुंचाई जाती है, जिसे रेडियो एपेक्ड आई कहते हैं। धमनियों में जहां तक दवा आसानी से चली जाती है, वह हिस्सा सही होता है। जहां यह दवा रुक जाती है, वह हिस्सा प्रभावित माना जाता है। एंजियोग्राफी से ही पता चलता है कि नसों में कितनी रुकावट है। इसमें कुल दो घंटे लगते हैं।

अवरुद्ध धमनियों को साफ करते हैं स्टेंट
हार्ट ब्लॉकेज को दूर करने के लिए स्टेंट का इस्तेमाल किया जाता है। स्टेंट लगाने से पहले नसों की ब्लॉकेज स्थिति जांची जाती है। अब स्टेंट की कीमतें पहले के मुकाबले 85 फीसदी तक कम हो गयी हैं। अब 25 से 30 हजार में मिलने वाला स्टेंट 6 से 8 हजार रुपये तथा 1 से 1.50 लाख रुपये में मिलने वाला स्टेंट 20 से 25 हजार रुपये में मिल जाता है। अगर ब्लॉकेज कम है तो उन्हें दवाओं से ही ठीक करने की कोशिश की जाती है।

हार्ट रेट को सामान्य रखता है पेसमेकर
सामान्यत: हृदय गति, प्रति मिनट 60 से 100 बीट्स होती है। 40 से कम होने पर समस्या गंभीर होने लगती है और ऐसी स्थिति में डॉक्टर पेसमेकर लगवाने की सलाह देते हैं। इसे दिल की बायीं या दायीं तरफ कॉलर बोन में त्वचा के नीचे फिट किया जाता है और नसों से जोड़ा जाता है। करीब 25 से 35 ग्राम वजन वाला यह पेसमेकर हृदय की मांसपेशियों में इलेक्ट्रिक इम्पल्स भेजता है, जिसे कृत्रिम हार्ट बीट बनने लगती है और हृदय गति सामान्य हो जाती है। एक पेसमेकर लगभग 10 से 12 साल चलता है।

आयुर्वेद ने मानव हृदय को दो हिस्सों- शारीरिक हृदय और भावनात्मक हृदय में बांटा है। जीवन को चलाने के लिए दोनों हिस्सों का स्वस्थ रहना जरूरी है। सबसे पहले खान-पान पर ध्यान दें। आयुर्वेद के अनुसार उतना ही खाएं, जितना आपके दोनों हाथों में समाता हो। भोजन समय पर खाएं। इससे पाचन-तंत्र सही तरीके से काम करता है। जंक फूड की बजाए ताजे फल और ताजी सब्जियों का सेवन करें।

दिल के कई रोगों में फायदेमंद है योग-शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाने और धमनियों में रक्त प्रवाह ठीक रखने में योग कारगर साबित हुआ है। इनमें सबसे महत्वपूर्ण सूर्य नमस्कार है। यह रक्त संचार बेहतर बनाता है। रोजाना करीब 25 बार प्राणायाम करने से लाभ मिलता है। हठ योग की हृदय मुद्रा को प्रतिदिन कम से कम 45 मिनट तक करने से धमनियां सेहतमंद रहती हैं। नियमित करें इनका अभ्यास

अंजलि मुद्रा में दोनों हाथों को जोड़कर छाती के बीच रखें और धीरे से सांस अंदर लें। थोड़ी देर सांस को रोके रखें और फिर धीरे-धीरे ही छोड़ें।

ताड़ासन तनाव को दूर करता है। इसके लिए सीधे खड़े हो जाएं और दोनों पैरों को बाहर की ओर हल्का सा फैला लें। दोनों हाथ को ऊपर ले जाकर नमस्कार की अवस्था में जोड़ लें। अब गहरी सांस लें और शरीर को स्ट्रेच करें।

पश्चिमोत्तासन के लिए दोनों पैरों को सामने की ओर स्ट्रेच करते हुए जोड़ लें। आगे झुकें। ध्यान रखें कि घुटने नहीं मुड़ने चाहिए। सिर को घुटने से लगाने की कोशिश करें। यह आसन धड़कनों की रफ्तार नियंत्रित रखता है।

खानपान का रखें ध्यान

दिल संबंधी 90 फीसदी मामलों में गलत खान-पान ही जिम्मेदार होता है। इसी से दिल की धमनियां प्रभावित होती हैं। धमनियों की अच्छी सेहत बनाए रखने के लिए सेब, चुकंदर, अनार और संतरे जैसे फल खाएं। नियमित व्यायाम, योग और तेज कदमों से चलने जैसी आदतों को अपनी जीवनशैली में जगह दें। अनाप-शनाप खाने और बाद में कसरत कर कैलरी बर्न करना कोई हल नहीं है। नियमित समय पर सोएं। तनावमुक्त रहने की कोशिश करें।

दिन की शुरुआत सेब या नाशपाती से करें।

सब्जियों को देर तक पकाने की जगह उन्हें ताजे नीबू के जूस से गार्निश करें।

धमनियों को स्वस्थ रखने वाले मसाले जैसे काली मिर्च और हल्दी, ताजी पीसकर खाएं।

अनार का सेवन धमनियों को खुलने में मदद करता है और ब्रोकली धमनियों को क्षतिग्रस्त होने से बचाती है।

जैतून के तेल में वसा बहुत कम होती है, जिसके सेवन से कोलेस्ट्रॉल नहीं बढ़ता।

टमाटर का सेवन भी धमनियों को अवरूद्ध होने से रोकता है।

यदि किसी की धमनियां अवरुद्ध हो चुकी हैं तो पूरे दिन में दो-तीन चम्मच से ज्यादा घी-तेल का प्रयोग नहीं करना चाहिए। धूम्रपान एवं शराब से दूर रहें।

ये हैं जरूरी टेस्ट

स्ट्रेस टीएमटी-इस टेस्ट में पहले शरीर को थकाया जाता है और फिर ईसीजी से जांच की जाती है। इससे हृदय रोगों के शुरुआती लक्षणों की पहचान में मदद मिलती है। .

ईकोकार्डियोग्राफी-यह टेस्ट दिल की गतिविधियों के बारे में बताता है, जिससे पता चलता है कि हृदय की मांसपेशियों को रक्त की कितनी आपूर्ति हो रही है। .

कोलेस्ट्रॉल की जांच-कई बार डॉक्टर इस टेस्ट को कई अन्य रिस्क फैक्टर्स जैसे आनुवंशिक कारणों, धूम्रपान और उच्च रक्तचाप आदि को भी ध्यान में रखते हुए कराते हैं। इसके अलावा सीटी हार्ट स्कैन और ईकेजी, जिसे सामान्यत: ईसीजी भी कहते हैं, कराए जाते हैं।

दिल संबंधी 90 फीसदी मामलों में गलत खान-पान ही जिम्मेदार होता है। इसी से दिल की धमनियां प्रभावित होती हैं। धमनियों की अच्छी सेहत बनाए रखने के लिए सेब, चुकंदर, अनार और संतरे जैसे फल खाएं। नियमित व्यायाम, योग और तेज कदमों से चलने जैसी आदतों को अपनी जीवनशैली में जगह दें। अनाप-शनाप खाने और बाद में कसरत कर कैलरी बर्न करना कोई हल नहीं है। नियमित समय पर सोएं। तनावमुक्त रहने की कोशिश करें।

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