उड़द दाल की खिचड़ी डायबिटीज करे कंट्रोल

मकर संक्रांति 2019 पर उड़द दाल की खिचड़ी खाने की परंपरा है। मान्यताओं और रिवाज के तौर पर खाई जाने वाली इस खिचड़ी के हेल्थ बेनिफिट्स के बारे में शायद आप नहीं जानते होंगे। अगर आप शाकाहारी हैं, तो उड़द की दाल आपके लिए प्रोटीन का शानदार विकल्प है।

उड़द की दल दो तरह की होती है सफेद और काली। काली उड़द पौष्टिक व सभी दालों में पोषक होती है। इसमें प्रोटीन, विटामिन-बी थायमीन, राइबोफ्लेविन, नियासिन, विटामिन सी, आयरन, कैल्‍शियम के साथ सभी आवश्यक पोषक तत्व पाए जाते हैं।

उड़द की दाल में अच्छी मात्रा में फाइबर होता है। इसलिए यह डायबिटीज के मरीजों के लिए मुफीद है। फाइबर आंतों में भोजन के पोषक तत्वों के अवशोषण को बढ़ाते हैं। यह दाल खून में इंसुलिन और ग्लूकोज के स्तर को संतुलित रखने में मदद करती है।

उड़द दाल की खिचड़ी कोलेस्‍ट्रॉल कम करने में मदद करती है। इसमें भरपूर मात्रा में मैग्नीशियम और फोलेट होता है जिससे यह धमनियों को ब्‍लॉक होने से बचाती है। मैग्नीशियम दिल को स्वस्थ रखने में सहायक है क्‍योंकि यह ब्‍लड सर्कुलेशन को बढ़ावा देता है।

मांसपेशियों के विकास में प्रोटीन का अहम रोल है। शाकाहारी लोगों के लिए उड़द की दाल प्रोटीन का अच्छा स्रोत है। आपको बता दें कि प्रोटीन त्वचा, ब्लड, मसल्स और हड्डियों की कोशिकाओं के विकास के लिए आवश्यक होते हैं।

उड़द की दाल आयरन का बेहतरीन स्रोत है। जिन महिलाओं को महावारी में दिक्कत होती है, उन्हें उड़द दाल या इसकी खिचड़ी जरूर खानी चाहिए। आपको बता दें कि महावारी से आयरन की कमी हो जाती है और यह दाल उसको पूरा करती है। इसे खाने से शरीर को ताकत भी मिलती है।

पेट से जुड़ी समस्याओं से पीड़ित लोगों को हफ्ते में एक दिन उड़द दाल की खिचड़ी जरूर खानी चाहिए। यह दाल फाइबर का भंडार है जिसके सेवन से पाचन सक्ति बढ़ती है और कब्ज जैसी समस्याओं से भी बचने में मदद मिलती है।

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