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इस उपाय से आपने क्रोध पर नियंत्रण करे

विश्व का हर इंसान चाहता है कि उसके परिवार के सदस्य प्रेम और अहिंसा के साथ जिये पर अगर वास्तविकता की बात की जाये तो ऐसा मनुष्य सिर्फ खुद के लिए सोचता है, आपने आसपास के लोगो के लिए नहीं . मनुष्य ने चाँद पर जाने तक का रास्ता तो खोज लिया हैं पर अपनी इन्द्रियों को वश में करके अपने क्रोध पर नियंत्रण करने का अभी तक कोई उपाय नहीं किया. इस संसार में  सुख-शान्ति से तो सभी रहना चाहते है परन्तु उसे पाने के लिए जो त्याग करना पड़ता है वह नहीं कर पाते जबकि वही सबसे आवश्यक है. क्रोध में मानव कई बार ऐसा अनर्थ कर देता है जिससे उसे जीवन-पर्यन्त पछताना पड़ता है.विश्व का हर इंसान चाहता है कि उसके परिवार के सदस्य प्रेम और अहिंसा के साथ जिये पर अगर वास्तविकता की बात की जाये तो ऐसा मनुष्य सिर्फ खुद के लिए सोचता है, आपने आसपास के लोगो के लिए नहीं . मनुष्य ने चाँद पर जाने तक का रास्ता तो खोज लिया हैं पर अपनी इन्द्रियों को वश में करके अपने क्रोध पर नियंत्रण करने का अभी तक कोई उपाय नहीं किया. इस संसार में  सुख-शान्ति से तो सभी रहना चाहते है परन्तु उसे पाने के लिए जो त्याग करना पड़ता है वह नहीं कर पाते जबकि वही सबसे आवश्यक है. क्रोध में मानव कई बार ऐसा अनर्थ कर देता है जिससे उसे जीवन-पर्यन्त पछताना पड़ता है.  हम अगर अपनी भावनाओं पर नियंत्रण करे तो बड़ी से बड़ी मुश्किल से लड़ सकते हैं तो यह क्रोध तो फिर भी बहुत मामूली सी भावना हैं. भावनाओं का महत्त्व बताते हुए भगवान महावीर ने कहा, ‘खून से खून को साफ नहीं किया जा सकता’ मानव को चाहिये कि वो  ‘जियो और जीने दो’ की शिक्षा का अपने जीवन में उपयोग करे , इस शिक्षा का अर्थ मात्र यह है कि ‘हमें दूसरों के जीवन में दखलअंदाजी नहीं करनी चाहिए’ .  क्रोध को वश में करने के लिए सबसे बेहतर तरीका हैं कि कुछ समय एकांत में बैठकर अपने आपको जानने का प्रयास करे क्योंकि आपसे बेहतर आपको कोई नहीं जान सकता हैं. जब आप स्वयं को भली भांति जान लेंगे तो आप यह सोचने में समर्थ रहेंगे की किस चीज़ से आपको गुस्सा आता हैं और क्या करके आप इसको कम कर सकते हैं.  प्रायः हमें क्रोध किसी की भूल के कारण आता है.अब जरा सोचिए भूल कहते किसको है? जो भूल जान बूझ कर न की गई हो, भला किसी को उसके लिए दण्ड क्या दिया जाये तो हम उस पर क्रोध क्यों करें जो हुआ ही गलती से हो, ऐसे में क्षमा कर देना ही बेहतर होता है इस प्रकार आपका गुस्सा भी कम होगा और इसका कोई दुष्प्रभाव आपके शरीर पर भी नहीं पड़ेगा .

हम अगर अपनी भावनाओं पर नियंत्रण करे तो बड़ी से बड़ी मुश्किल से लड़ सकते हैं तो यह क्रोध तो फिर भी बहुत मामूली सी भावना हैं. भावनाओं का महत्त्व बताते हुए भगवान महावीर ने कहा, ‘खून से खून को साफ नहीं किया जा सकता’ मानव को चाहिये कि वो  ‘जियो और जीने दो’ की शिक्षा का अपने जीवन में उपयोग करे , इस शिक्षा का अर्थ मात्र यह है कि ‘हमें दूसरों के जीवन में दखलअंदाजी नहीं करनी चाहिए’ .

क्रोध को वश में करने के लिए सबसे बेहतर तरीका हैं कि कुछ समय एकांत में बैठकर अपने आपको जानने का प्रयास करे क्योंकि आपसे बेहतर आपको कोई नहीं जान सकता हैं. जब आप स्वयं को भली भांति जान लेंगे तो आप यह सोचने में समर्थ रहेंगे की किस चीज़ से आपको गुस्सा आता हैं और क्या करके आप इसको कम कर सकते हैं.  प्रायः हमें क्रोध किसी की भूल के कारण आता है.अब जरा सोचिए भूल कहते किसको है? जो भूल जान बूझ कर न की गई हो, भला किसी को उसके लिए दण्ड क्या दिया जाये तो हम उस पर क्रोध क्यों करें जो हुआ ही गलती से हो, ऐसे में क्षमा कर देना ही बेहतर होता है इस प्रकार आपका गुस्सा भी कम होगा और इसका कोई दुष्प्रभाव आपके शरीर पर भी नहीं पड़ेगा .

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