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आताताई राजा का वध करने प्रकट हुई थीं यहां मां, भोलेनाथ ने भी किया था विश्राम

जिले मेहनौन गांव में पिंडी स्वरुप विराजमान मां पटमेश्वरी देवी का स्थान भक्तों की आस्था का केंद्र है। किवदंती के अनुसार एक आताताई राजा से मुक्ति दिलाने पर यह यहां उनकी पूजा की जाती है। मान्यता है कि आततायी राजा का वध कर मां पटमेश्वरी ने इस क्षेत्र को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई थी और और स्वयं भी अपने प्राण त्याग कर पिंडी के रूप में विराजमान हो गयी थीं। प्रत्येक सोमवार व शुक्रवार को भक्तों की भीड़ दर्शन व पूजन करने के लिए आती है। नवरात्र के दौरान तो यहां भारी भक्तों की भारी भीड़ है होती है।

नवविवाहिताओं का हरण करता था राजा

जनश्रुतियों के अनुसार कई सौ वर्ष पहले मेहनौन क्षेत्र में एक राजा हुआ करता था जो बहुत ही आताताई हो गया था। इसका अत्याचार इतना बढ़ गया था कि इस गांव की ओर से गुजरने वाले नव विवाहित डोले को रोक लेता था। जन चर्चा के अनुसार राजा बलपूर्वक नवविवाहिताओं से इसी बाग में दुराचार करता था। समय बीतता गया इसी बीच एक और डोला गुजरने लगा तो राजा ने उसे भी रोक लिया और जब दुराचार करने का प्रयास किया तो उस नवविवाहिता ने चंडी का रुप धारण कर लिया और राजा की ही तलवार से उसका वध कर दिया। फिर अंतरध्यान हो गयीं। तभी से वे मां पटमेश्वरी देवी के नाम से विख्यात हुई।नवरात्रि में यहां पर प्रतिपदा से पूर्णमासी तक भक्तों की भारी भीड़ मां के दर्शन व पूजन के लिए उमड़ती है |

भोलेनाथ ने किया था यहां विश्राम 

सतीसह महादेव:मेहनौन मपुस्थितम्। एक रात्रो स्थित्वा च पुनर्गत: अगस्त्याश्रमम्।।
संत शिरोमणि व पूर्व सांसद डॉ राम विलास वेदांती कहते हैं कि इस स्थान के बारे में पुराणों में वर्णित इस श्लोक से पता चलता है कि एक बार अगस्त ऋषि के आश्रम में राम कथा सुनने के लिए जाते समय भगवान भोलेनाथ ने अपनी भार्या माता सती के साथ मेहनौन स्थिति पटमेश्वरी के स्थान पर गुप्त रूप से एक रात्रि निवास किया था। उन्होंने बताया कि भगवान शंकर ने अयोध्या से प्रयाग होते हुए अगस्त ऋषि के आश्रम में जाकर राम कथा का रसपान किया था। गुप्त रूप से निवास करने के कारण गुप्तेश्वरी देवी आगे चलकर मां पटमेश्वरी देवी के नाम से विख्यात हुई है।

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